बुधवार, 20 नवंबर 2013

मानव लिप्सा झंकृत करती ,

जंगलों   का    है  दृश्य   मनोरम ,,
जंगली   जीव    रहा   करते ,,
जब    से   मानव    जंगल  काटे ,
शहरों   में  मंगल  किया   करते  हैं ,,
मानव   लिप्सा  झंकृत  करती ,
आलंकृत   उन   श्रृंगारों   को ,
कुर्बान   करे    निज   चाहत  में ,
 कानन  के    श्रृंगारों    को ,
मौन    सहे   कब   तक    ये   जंगल  ,,,
मानव    के   निज    मंगल   को ,
मानव   लिप्सा   झंकृत   करती
आलंकृत   उन   श्रृंगारों    को ,,,,




बढ़   जाती   है  ख्वाविस    उनकीं ,
नवजीवन   प्रेम     तरंगों    में ,,,
प्रेम  में    प्रेम  को  लूट    रहें  है ,,
सावन   मास   फुहारों   में ,,
मानव   लिप्सा   झंकृत   करती ,
 आलंकृत   उन   श्रृंगारों  को
राजकिशोर    मिश्रा  २० /१ १ /२ ० १ ३ 

रविवार, 17 नवंबर 2013

उल्लू और हंस दुनिया के संग

वक्त की बदलती हुई नजाकत को नजर अंदाज करना ना आदर्शवाद है ना प्रकृतिवाद, बल्कि मानव मन की कुंठा है। जो दास बना दिया है, उल्लू पर विराजमान श्री का उल्लू, हंसवाहिनी मां शारदा का पुजारी, कभी-कभी उल्लुओं से मात खा जाता है जिन्हें शुद्ध बोलना बोलने की शैली भी नही सीखी है। जिन्हें आप सामान्य भाषा मे मूर्ख और जाहिल भी कह सकते हैं। कौवे की तरह कांव-कांव करना जिनको विरासत में प्राप्त हुआ है। कोयल की मधुर बोली की झंकार भी कौवे की कांव-कांव में दब जाती है। यह विधाता का कैसा फरमान है? अवगुनी गुणी को शिक्षा देता है।

झूठ फरेब के पिलर [खंब] पर बनी हुई इमारत का अस्तित्व क्या, बालू से बनी हुई इमारत की बिसात क्या... फिर भी अहंकारी नाग सा मदान्ध मूर्ख को ज्ञान कहाँ.., उसका अस्तित्व उस पिलर में ही निहित है। संस्कार उसके कार में दब जाते हैं। संस्कार विहीन कार इंजन अज्ञान रूपी तिमिरंध मे भटक जाता है। जिसका कोई उद्देश्य नहीं होता, उद्देश्य विहीन स्वार्थी और लालची व्यक्ति से सुख कोसों दूर भाग जाता

उड़ जा रे दुख के तू पंछी..
आज बहेलिया जाल बिछाया..
जिसको तूने अपना समझा..
वही हुआ है पराया..
उड़ जा रे दुख के तू पंछी
यह शहर हुआ बेगाना..
नहीं है नेकी अब अफ़साना..
कितना कोई कोमल दिल हो..
अब नहीं नेक जमाना..
बहुरिया बदल ले अब तू ठिकाना..
बहुरिया अब नहीं नेक जमाना..
बन के बहेलिया चारा डाले..
करता नित नव फसाना..
बहुरिया बदल गया अब जमाना
सेवक स ठ नृप कृपन कुनारी..
कपटी मित्र सूल सम चारी.. [रामचरित मानस 6/9]
सचिव बैद गुरु तीन जौं, प्रिय बोलहिं भय आस..
राज धर्म तन तीनकर, होइ बेग़ही नाश.. [सुंदरकांड दोहा/37]
चाटुकारों से भरी धरती, नया पैगाम लाती है..
फतह होगा क़िला यह भी, नया संदेश सुनाती है..
दिखे वह पंच तारे भी, सितारें गर हों गर्दिश में,
कहूँ क्या बात सिंहों [शेर] की, सियारों से तबाही है.. [राधेश्याम तर्ज]
rajkishor   mishra 

बाळ दिवस

रात और दिन का अंतर भी , नहीं जानते बच्चें ए ,,

आजादी स्वप्न उन्हे लगता,जैसे -

पिजड़ें मे कैद हुआ पनछी,,

क्या जाने सुख की साँसों को,

रुसवाई जिसने है देखी ,,

करें कल्पना सावन की,

जेठ की तपती धूपों मे ,,,

पदत्राण सहे रवि ग्रीष्म ,

तपित धरती संग ,,

चिंटू -मिंटू की देखि दशा ,

विह्वल धरती यह सोच  रही है  ,

आज का बालक कल का निर्माता ,

कैसे बनेगा भाग्य बिधाता ,,,

मालिक के मालिकानें मे भूखे बच्चे सब सोय रहें है ,,

सरकार बाळ श्रमिक उन्मूलन नित कानून बनाती है ,,

पर वह कागज तक सीमित रहते बच्चों को सदा रुलाती ,

महरूम हैं शिक्षा से बच्चें,

नित करें ग़ुलामी मलिक की ,,

रूखी -सुखी रोटी कितनी तड़पाती है इन बच्चों को ,,,,

वसनहीन बाळ हैं बेकरार रोटियों से ,,,

ग्रीष्म ,शीत और बरसात , काली नित घनघोरी रात ,,

मालिक की आवाजों मे , आफत की होती है बरसात ,

क्या जाने बाळ है बाळ दिवस , हर दिन बीते काल दिवस ,

,आडंबर करती सरकारें , बालक क्या जाने बॉलदिवस

राजकिशोर मिश्रा 14/11/2013 

बुधवार, 6 नवंबर 2013

उल्लू और हंस दुनिया के संग

वक्त की बदलती हुई नजाकत को नजर अंदाज करना ना आदर्शवाद है ना प्रकृतिवाद, बल्कि मानव मन की कुंठा है। जो दास बना दिया है, उल्लू पर विराजमान श्री का उल्लू, हंसवाहिनी मां शारदा का पुजारी, कभी-कभी उल्लुओं से मात खा जाता है जिन्हें शुद्ध बोलना बोलने की शैली भी नही सीखी है। जिन्हें आप सामान्य भाषा मे मूर्ख और जाहिल भी कह सकते हैं। कौवे की तरह कांव-कांव करना जिनको विरासत में प्राप्त हुआ है। कोयल की मधुर बोली की झंकार भी कौवे की कांव-कांव में दब जाती है। यह विधाता का कैसा फरमान है? अवगुनी गुणी को शिक्षा देता है।

झूठ फरेब के पिलर [खंब] पर बनी हुई इमारत का अस्तित्व क्या, बालू से बनी हुई इमारत की बिसात क्या... फिर भी अहंकारी नाग सा मदान्ध मूर्ख को ज्ञान कहाँ.., उसका अस्तित्व उस पिलर में ही निहित है। संस्कार उसके कार में दब जाते हैं। संस्कार विहीन कार इंजन अज्ञान रूपी तिमिरंध मे भटक जाता है। जिसका कोई उद्देश्य नहीं होता, उद्देश्य विहीन स्वार्थी और लालची व्यक्ति से सुख कोसों दूर भाग जाता

उड़ जा रे दुख के तू पंछी..
आज बहेलिया जाल बिछाया..
जिसको तूने अपना समझा..
वही हुआ है पराया..
उड़ जा रे दुख के तू पंछी
यह शहर हुआ बेगाना..
नहीं है नेकी अब अफ़साना..
कितना कोई कोमल दिल हो..
अब नहीं नेक जमाना..
बहुरिया बदल ले अब तू ठिकाना..
बहुरिया अब नहीं नेक जमाना..
बन के बहेलिया चारा डाले..
करता नित नव फसाना..
बहुरिया बदल गया अब जमाना
सेवक स ठ नृप कृपन कुनारी..
कपटी मित्र सूल सम चारी.. [रामचरित मानस 6/9]
सचिव बैद गुरु तीन जौं, प्रिय बोलहिं भय आस..
राज धर्म तन तीनकर, होइ बेग़ही नाश.. [सुंदरकांड दोहा/37]
चाटुकारों से भरी धरती, नया पैगाम लाती है..
फतह होगा क़िला यह भी, नया संदेश सुनाती है..
दिखे वह पंच तारे भी, सितारें गर हों गर्दिश में,
कहूँ क्या बात सिंहों [शेर] की, सियारों से तबाही है.. [राधेश्याम तर्ज]

मंगलवार, 5 नवंबर 2013

दीपावली

दीपावली  जन -जन  के   जीवन  मे   उत्साह  ,उमंग , प्रकाश ,   समृद्धि  और  आरोग्यता  का   प्रतीक   बने ,,,  तिमिरंध  विनाशक , ज्ञान   प्रकाशक  दीप की   लड़ियाँ  आपके   जीवन  को  नवीन आभा   से   प्रकाशित   करें ,,,, दीपावली स्वच्छ्ता का प्रतीक और सभी धर्मों का त्योहार है ,,,,
1- हिन्दू  धर्मशास्त्रों के अनुसार - भगवान राम की लंका पर विजयोपरांत अयोध्या आने की खुशी मे दीप जलाये ,,,
2-  कृष्ण भक्तिधारा से जुड़े लोग पृथ्वी पुत्र नरकासुर [भौमासुर] के अत्याचार देव से मनुष्य तक त्रस्त थे देव माता आदिती का कुंडल छीन लिया था ,, 16100/ राजकन्याओं को बंदी बना कर रखा था ,,, चतुर्दशी के दिन सत्यभामा के सहयोग से महा आततायी दैत्य से मुक्ति दिलाई , अगले दिन कृष्ण के गोकुल आने पर गोकुल वासियों ने घी के दीये जलाये ,,,, 3=      महर्षि दयानंद का जन्म और महाप्रयाण दीपावली के दिन था मा गंगा के पावन तट पर समाधि ली ,,,,आर्य समाज के संस्थापक थे ,,,
 4-जैन धर्म के चौबीसवे तीर्थकर महावीर स्वामी निर्वाण दिवस दीपावली के दिन है ,,,,
5= सिक्खों के पवित्र गुरुद्वारा स्वर्ण मंदिर का शिलान्यास भी दीपावली के दिन हुआ है ,,,,,दिवाली के दिन छठें गुरु हरगोविन्द सिंह जेल से रिहा हुए थे ,,
दीपावली के दिन लक्ष्मी और गणेश का पूजन किया जाता है ,,,, घर मे सुन्दर -सुन्दर रंगोली बनाई जाती है ,, पकवानो की तो बात ही निराली,,,,,, जिसको जो मन आया वही बना कर खाया ,,,,,,
  दीपावली   धनतेरस   से  लेकर  दीपावली के   दो  दिन  बाद  भाई  दूज  तक मनाया   जाता है ,,,दीपावली के पूर्व अपने घरों की सॉफ सफाई और रंग रोगन करने लगते हैं ,,, वैसे भी बरसात के बाद घर की सफाई रंग -रोगन आवश्यक हो जाता है ,,,,/ दीपावली के पूर्व बाजार की रौनक ही बदल जाती ,,, भारतीय और चाईना की रंग -विरंगी झालर दियली झूमर पटाके आतिश बाजार मे चार -चांद लगा देते हैं ,,,,मिठाई की दुकानों की रौनक बदल जाती है , ड्राय फ्रूट बाजारी चमक धमक महा नगरों मनोरम रम्यता स्वतः आकर्षित कर लेती है ,,,, धन तेरस के दिन सोने -चांदी के आभूषण ग्राहक आकर्षण के केन्द्र बने रहते हैं ,,,, बर्तन की दुकानदारों और धनतेरस को मानने वालों के विशेष होता है ,, लोग इस दिन बर्तनों की भी खरीददारी करते हैं ,,,,,                               दीपावली सुख समृद्धि आरोग्यता , और खुशियों का त्योहार है ,,,, हिन्दू वर्ण व्यवस्था के अनुसार दीपावली वैश्यों [धनिक , व्यापारियों ] का त्योहार है ,,,, भगवान राम द्वारा लंका विजयोपरांत अयोध्या आगमन की खुशी मे दीप जलाये ,,,,पौराणिक कथा के अनुसार देवता और दैत्यों ने मंदराचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बना कर समुद्र मंथन किया जिससे चौदह रत्न====
=हलाहल विष हरे भोले ,,
लक्ष्मी विष्णु संग डोले ,,
हलाहल विष हरे भोले ,,,,
कामधेनु और रम्भा ,
वारुणी ,पारिजात है
देवराज के गज को देखो है ऐरावत नाम , 
दैत्यराज बालि तुरंग [अश्व]उच्चाश्रवा हुआ तब नाम  ,
रजनी पति का सागर उद्गार हुआ ,
, पंचजन्य शंख की ध्वनि जब गुज़ें,
आह्लादित संसार हुआ ,
, धनवंतरि सा वैद भी
निकला लेकर अमृत रस
,,हलाहल विष पीये भोले,,
असतो मा सद्गमय , तमसो मा ज्योतिर्गमय  दीपावली   धनतेरस   से  लेकर  दीपावली के   दो  दिन  बाद  भाई  दूज  तक मनाया   जाता है ,,,दीपावली के पूर्व अपने घरों की सॉफ सफाई और रंग रोगन करने लगते हैं ,,, वैसे भी बरसात के बाद घर की सफाई रंग -रोगन आवश्यक हो जाता है ,,,,/ दीपावली के पूर्व बाजार की रौनक ही बदल जाती ,,, भारतीय और चाईना की रंग -विरंगी झालर दियली झूमर पटाके आतिश बाजार मे चार -चांद लगा देते हैं ,,,,मिठाई की दुकानों की रौनक बदल जाती है , ड्राय फ्रूट बाजारी चमक धमक महा नगरों मनोरम रम्यता स्वतः आकर्षित कर लेती है ,,,, धन तेरस के दिन सोने -चांदी के आभूषण ग्राहक आकर्षण के केन्द्र बने रहते हैं ,,,, बर्तन की दुकानदारों और धनतेरस को मानने वालों के विशेष होता है ,, लोग इस दिन बर्तनों की भी खरीददारी करते हैं ,,,,,                               दीपावली सुख समृद्धि आरोग्यता , और खुशियों का त्योहार है ,,,, हिन्दू वर्ण व्यवस्था के अनुसार दीपावली वैश्यों [धनिक , व्यापारियों ] का त्योहार है ,,,, भगवान राम द्वारा लंका विजयोपरांत अयोध्या आगमन की खुशी मे दीप जलाये ,,,,पौराणिक कथा के अनुसार देवता और दैत्यों ने मंदराचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बना कर समुद्र मंथन किया जिससे चौदह रत्न====
=हलाहल विष हरे भोले ,,
लक्ष्मी विष्णु संग डोले ,,
हलाहल विष हरे भोले ,,,,
कामधेनु और रम्भा ,
वारुणी ,पारिजात है
देवराज के गज को देखो है ऐरावत नाम , 
दैत्यराज बालि तुरंग [अश्व]उच्चाश्रवा हुआ तब नाम  ,
रजनी पति का सागर उद्गार हुआ ,
, पंचजन्य शंख की ध्वनि जब गुज़ें,
आह्लादित संसार हुआ ,
, धनवंतरि सा वैद भी
निकला लेकर अमृत रस
,,हलाहल विष पीये भोले,,
असतो मा सद्गमय , तमसो मा ज्योतिर्गमय
दीपावली की सार्थकता तभी संभव है , जब जन -जन अंधकार से प्रकाश मय हो जाये , ग्यान के दीप की प्रकाश लालिमा सारा जहां सारोबार हो जाये ,,, चिराग तले अधेरा सिर्फ एक कहावत बन कर रह जाये ,,,, कवि ने बड़े मार्मिक शब्द मे लिखा है=
जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना ,,,
अंधेरा धरा पर कंही रह ना जाये,,,,

गुरुवार, 24 अक्टूबर 2013

छलिया छल भेष अनूप बनायो

संत असंत भी संत भये,
निर्भय सब काम विध्वंस भये ,,
परलौकिक लौकिक आज नहीं,
हर -युग मे दुर्जन रूप बनायो,, ,

भानुप्रताप नरेश रहे ,
यश कीर्ति जाके द्वार बसे
धर्म धुरंधर नीति प्रवीना ,,
छलिया छल वेश नरेश से कीन्हा ,

बिप्र न से अभिशाप दिलायो
छल विद्या ताहि विनाश करायो ,,
छल का रूप अनेक रहा
,लंकापति रूप अनूप बनायो ,,,

सीय हरे हरि नारि भिखारी ,
प्रगटे रूप नरेश बनायों
बल दम्भ कौन जो नारि चुरायो,,,,,,,
छलिया छल भेष अनूप बनायो ,,,,
यदि कलियुग संत असंत रहे ,,
व्यभिचार सदा सर्वांग रहे ,,,
विस्मय कैसा आडंबर ,,
दिखता ऐसा भूमंडल मे ,,

नृत्य और आडंबर करता ,
मीरा भक्ति का करे= दिखावा
जड जंगम जाने आडंबर ,,,
फिर भी भक्ती का चढ़ा कमंडल ,,,,

छलिया छल भेष अनूप दिखावा ,,,,,,,,
, वास्तविक संत कैसे हैं,
नाहिं मीडिया की छाया मे ,,
स्वारथ के वट बंध्य नहीं है ,,

जन हित उनके आदर्श रहें है ,
मानवता , दर्पण है उनका ,
परोपकार रग रग मे छाया ,,
स्वारथ के वॅट बंध्य नहीं है ,,,
नहीं मीडिया की छाया ,,,,,,,

रविवार, 20 अक्टूबर 2013

politics

  नारायण  के  वच्छास्थल   से  निकली  हुई   राजनीति  को नमन  करता हूँ ,   हे राजनीति   तुम  सम्पूर्ण  ब्रहमांड  की  जननी   हो ,
 प्रत्यक्ष  या  परोक्ष  रूप  से  आपके  चक्रव्यूह  से  कोई  नहीं   बचा  है , आज  सूफी  संत , महात्मा , धर्माधिकारी , आपके  
आधीन  हैं ,  धर्म भी  आज  आपकी  चौखट  का पहरेदार  बन चूका  है ,,,   नेताओं  का काम  नेतागिरी  करना  है ,,,  पहले  गांधीगीरी  ज़माना  था ,,  नम्रता , सद्भाव ,अहिंसा    उनके  आभूषण  हुआ  करते थे ,,,  आज  कल  के  नेताओं  से  प्रदुषण 
हुआ  करते  है ,,, आज  हमारे  भारत  के  ज्यादातर  नेता  जेलखानो से लेकर  मर्डर , बलात्कार ,  हिंसा  जैसे  अद्वातीय 
कारनामों  के  मुरीद  हो चुके  हैं ,  वोट  और  नोट  की प्रतिस्पर्धा  उन्हें  उस  पायदान  पर  लाकर  खड़ा  कर दिया ,  जो  उनकी 
 अस्मिता  पर  बदनुमा  दाग  है ,,,  फिर   भी  हमारे  नेता  जी  बेदाग़  हैं ,,   कड़क -  काजी  श्वेत  परिधान  की    चमक  उनकी 
बेदाग़ पन  का     शंखनाद  है , काले  कारनामों  के लिए  मशहूर  नेता  जी  समाज  के  आदर्श  होते है ,,,
अब  हम  उत्तरप्रदेश  की  राजनीति  की  बात  करते  हैं ,,  वहाँ  सपा  में यूपी   एग्रो  के  चेयरमैन   नरेन्द्र  भाटी   जी है ,,,  आजकल  उनके  काम  के कारनामे  भारत  के  न्यूज चैनल  से लेकर  समाचार  पत्रों   की  रौनक  बनाए  हुए हैं ,,
४ १  मिनट  के  कारनामों   की  धमाल  सुनकर  मुझे  आश्चर्य  होता   है ,  क्या  हमारे  देश  का  लोकतंत्र  यही है ,,
 फिर  मै  सोचता  हूँ ,  ये  लोकतंत्र  नहीं   नेतागीरी  है ,, एक  सज्जन  हमसे   पूछे   यूपी  में नेतागीरी  बहुत  है 
 हमने  कहा    वहाँ  सीट  ज्यादा  है ,,  नरेन्द्र  भाटी  का  नाम  नहीं  सुना  था ,,,
तभी  सम्पूर्ण   भारत  बच्चा -बच्चा   सुन  रहा  है ,,  ४१   मिनट   का  कमाल ,,,
 गिनीज  बुक  की  टीम  भी  समीक्षा  करने  के लिए  आने  वाली  है ,,,,
वो  किसलिए 
उनका  काम  क्या  है ,,
अदभुत  कार नामों  का  पंजीकरण  करना ,,,
कौन  बुला  रहा  है ,,,
न्यूज  चैनल  , से लेकर  समाचार  पत्र  वाले  खबर  छाप -छापकर  आने  के लिए  मजबूर  कर देंगे ,,
वाह  मिडिया ,,
गौतम  बुद्धनगर  की  धरा  पर अहिंसा  के पुजारी   गौतम  बुद्ध  की  अहिंसा , के  क्षेत्र  में   हिंसा  का  रूप  देने वाले नेता 
उन्हें  धर्म  से ज्यादा  रेत  माफियाओं  से लगाव  है ,,  इसे मस्जिद  से जोड़कर  साम्प्रदायिकता  का  बीज  बोना 
जनता  को  गुमराह  करना  है ,,  सरकारी  जमीन  पर मस्जिद  बनाना ,,  नेताजी द्वरा  चन्दा  देना  , शिलान्यास  करना 
क्या  है ,,, 
नेता  होकर  सरकारी  जमीन  का  धार्मिक  अधिग्रहण  करना ,,,,  क्या  एक  सोची समझी  राजनीति  नहीं है ,,,,
आई  ए  एस  एस डी  एम्  दुर्गा  नागपाल का रेत  माफियाओं  पर कार्यवाही  का  प्रतिशोध  था 
ईमानदार  सशक्त  युवा  महिला  अफसर  को  निलंबित  कराना ,,,  उनकी  हार   और  हताशा  का    नतीजा  था ,, 
प्रसन्नता  का  इजहार  ४ १  मिनट  का  सस्पेंड  आर्डर  था ,,,,
जो उनकी  भूल   थी ,
जो  उन्हें  न  उगलते  बन  रहा  है  , न  निगलते ,,,,
हार  और  प्रतिकार  स्वरूप  नेताजी  आशय  को  वेआशय   बताते  हैं ,,,,,
आजकल  के नेता जी  आवेश  में  कुछ  भी  बोल्  देते हैं , 
कांग्रेस  की  दिग्विजय  जी  उनके कामेन्ट  सदैव  चर्चे  में रहे  हैं ,,,
महाराष्ट्र   के वरिष्ठ  नेता  अजीत पवार  ,  समाज  सेवक  देशमुख   द्वरा  पानी की  मांग  पर  अभद्र  टिप्पणी  
से  चर्चित  रहे  हैं ,, 
नेताओं  द्वारा  एस  आई  को पीटना ,  झगडा  करना ,,, 
 आदि  नेता  वृत्तांत  को  परिसीमित  नहीं  किया   जा  सकता 
 नेता  जी  हैं  आवेश  में आये   , भूल  हो  गयी ,,
जनता  की  चाहत  चकना  चूर  हो गयी ,,,,
ॐ  जय  नेता  देवा ,,
जो जन  करते  तुम्हारी  सेवा ,,,
क्लेश  विकार  उन्हें  न  होवे ,,
सुख  सम्पति  चढ़ते  सब  मेवा ,,
ॐ  जय -जय  नेता  देवा ,
भक्ति  -भाव  से  करे  जाप  जो ,
उनके  कष्ट  को हरते  आप  हो ,,
जो  जन  उनको  त्रास  देत  हैं ,,
उनको  आप  श्राप  देत  हैं ,,,
मन क्रम  बचन  करे  जो सेवा ,
 चिरंजीव  खावे   नित  मेवा ,,,,
 ॐ  जय  जय   नेता देवा ,,
आपकी  महिमा  जो नित  गावै ,
दस  ग्रह  ताहि  निकट  नहिं  आवै ,,,,,,
आप  सोचते  ग्रह  दस  क्या है ,,
नेता  से डरते  ग्रह  सब हैं ,,,,
शुक्र   शनि  भी  बने  अर्दली ,
गुरु  से मच  गयी  नयी  खलबली ,,
 सोम  और  ,रवि  गति  न  पावै 
जब  तक  नेत  महात्म्य    न गावै ,,//
ॐ जय -जय   नेता  देवा ,,,,,
 मंगल , बुध  शुद्ध  तब  होई 
जब  नेता  की  अस्तुति   होई ,,
  राहू  ,केतु  का   औकात ,,
जऊ  नेता  से  पावहि  पार ,,,,,
ॐ जय  नेता  देवा ,,
जन  जन  करता  आपकी  सेवा 
 ॐ  जय  जय  नेता  देवा ,,,,
मेरा  इरादा  किसी  नेता  का  अपमान  नहीं , बल्कि  यथार्त  से अवगत  कराना  है ,  दर्पण   सच्चा  मित्र   होता  है ,,,
सत्य  कडुआ  होते हुए  भी  न्याय  संगत  है ,,, लोकतंत्र  में जनता की भावनाओं  की  कद्र  करना  जनप्रतिनिधि  का 
दायित्व  है  , इस सत्य  से  बंचित  होना  , न्याय  संगत  नहीं , अब्राहिम  लिंकन  ने कहा  है ,,,  लोकतंत्र  जनता के लिए 
जनता  द्वरा  जनता  के ऊपर  शासन  है ,,,, ,,,, आप  जनता  [वोटर]  द्वरा  निर्वाचित  होकर  जन  मार्ग  से विमुख  होना 
आपकी  उदासीनता  का  द्योतक  है ,,,,,
जय  हिन्द  , जय  भारत ,,,,,,
v

शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा चाँद अलौकिक
अनुपम छवि है ,
कृष्ण कला मय चाँद हुआ है ,,,
आज मनोरम,
सोलह कला परिपूर्ण हुआ है ,
अम्बर मे अह्लाद झलकता ,,
चाँद आज परिपूर्ण हुआ है ,,
अर्धचंद्र शिव मस्तक राजे ,,
शरद पूर्णिमा  अति शुभ लागे
शरद पूर्णिमा लक्ष्मी पूजन ,
स्वीकारें भक्तों का बंदन
नील गगन का पूर्ण चन्द्रमा ,
, शीत पवन के झोकें,
मलयागिरी सा अनुपम खुशबू ,
भर देता जन-जन में ,,,
अम्बर मे आह्लाद झलकता
आज चाँद परिपूर्ण हुआ है ,,

गुरुवार, 17 अक्टूबर 2013

दागी नेता बे फिकर रहो ,,

दागी नेता बे फिकर रहो ,,
मोर्चा हमने संभाल लिया है,,
ग्रहों की देखी तीव्र दशा ,,
संकट मोचन
कवच बनाय लिया है ,,,,
दागी नेता बे फिकर रहो,
मोर्चा हमने संभाल लिया है ,,,
नया आर्डिनेंस लायेंगे ,,
तर्क से उसे सजाएंगे ,,,
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को
बदल कर दिखाएंगे ,,,,
मै संसद हूं,,,
आप सांसद ,
कानून बनाना ,
मेरा काम ,
बना लेंगे नया कानून,,
आपका सहयोग
चाहिये सदन मे ,,,,,,,,,
जब बात हमारे
हित की ,
फिर चिंता है ,
किस बात की ,,,
कानून निर्मात्री सभा ने ,
दिया अभय वरदान ,,,
दागी नेता बे फिकर रहो ,,
मोर्चा मै ने संभाल लिया है ,
संसद देश की शान है ,,
उस पर हमे अभिमान है ,,,
जनप्रतिनिधित्व
कानून की धारा ,
जनप्रतिनिधि का
यही सहारा ,,,
रहें जेल
जन वोट न डाले,,
फिर नेता===================
चुनाव कैसे लड. डाले.,
, बात खटक गयी
न्यायालय को ,
माननीय न्यायालय ने
तुरंत किया निदान,,,,
सांसद जी हो गये परेशान,,
मानसून सत्र मे कर दिया,
उसका तुरत निदान ,,
अभय रहो नेता जी ,,,
हो गया है काम ,,,,
दागी नेता बे फिकर रहो
 मोर्चा हमने
संभाल लिया है ,,,,,,,
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25 september2013= RAJKISHOR MISHRA
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 दागी नेता बे फिकर रहो ,,
मोर्चा हमने संभाल लिया है,,
ग्रहों की देखी तीव्र दशा ,,
संकट मोचन
कवच बनाय लिया है ,,,,
दागी नेता बे फिकर रहो,
मोर्चा हमने संभाल लिया है ,,,
नया आर्डिनेंस लायेंगे ,,
तर्क से उसे सजाएंगे ,,,
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को
बदल कर दिखाएंगे ,,,,
मै संसद हूं,,,
आप सांसद ,
कानून बनाना ,
मेरा काम ,
बना लेंगे नया कानून,,
आपका सहयोग
चाहिये सदन मे ,,,,,,,,,
जब बात हमारे
हित की ,
फिर चिंता है ,
किस बात की ,,,
कानून निर्मात्री सभा ने ,
दिया अभय वरदान ,,,
दागी नेता बे फिकर रहो ,,
मोर्चा मै ने संभाल लिया है ,
संसद देश की शान है ,,
उस पर हमे अभिमान है ,,,
जनप्रतिनिधित्व
कानून की धारा ,
जनप्रतिनिधि का
यही सहारा ,,,
रहें जेल
जन वोट न डाले,,
फिर नेता===================
चुनाव कैसे लड. डाले.,
, बात खटक गयी
न्यायालय को ,
माननीय न्यायालय ने
तुरंत किया निदान,,,,
सांसद जी हो गये परेशान,,
मानसून सत्र मे कर दिया,
उसका तुरत निदान ,,
अभय रहो नेता जी ,,,
हो गया है काम ,,,,
दागी नेता बे फिकर रहो
 मोर्चा हमने
संभाल लिया है ,,,,,,,
 --------------------------------------------------------
25 september2013= RAJKISHOR MISHRA
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बेटी हैंकुल सेतु

बेटी कुल सेतु हुआ करती,
दो कुल इससे तर जाते हैं,,,
प्रेम ,स्नेह ,सद्भाव की गुड़िया ,
ह्रदय कमल खिल जाते हैं,,
सेवा और समर्पण इतना ,
बरबस सब झुक जाते हैं,,
बेटी कुल सेतु हुआ करती,
दो कुल इससे तर जाते हैं,,,,
बेटी सोम सुधा रस जैसी,
,मम्मी ,पापा के नैनो पलकी,,
आँगन की मुस्कान है बेटी ,,,
,सारे जहां की शान है बेटी ,,
प्रेम की निर्मल गंगा बहती ,,
जन -जन को आनन्दित करती ,,
बेटी कुल सेतु हुआ करती ,,
दो कुल इससे तर जाते हैं।
पुत्री कूलसेतु हुआ करती ,
 जब पुत्री पुत्री सी रहती ,,,,
मायके ससुराल की रौनक है ,
,बाबुल के आँगन की बिटिया ,,
चाहत की प्रतिमूर्ति सी गुड़िया
, ग्यान और विग्यान की सूरति,,,
दो वंशों की कुल गौरव है ,,
 प्रेम ,स्नेह धर्म आकांक्षा मूरति
बेटी कुल सेतु हुआ करती,
दो कुल इससे तर जाते हैं,,,

रविवार, 6 अक्टूबर 2013

ऐसा कोई देश नहीं जो आबाद रहा हो ,,,,

सा कोई घर नहीं बे दाग रहा है ,,,,

ऐसा कोई देश नहीं जो आबाद रहा हो ,,,,



ऐसा कोई  व्यक्ति नहीं जिसमे रोग नहीं है,,,

ऐसा कोई जीव नहीं , जिसमे भोग नहीं है ,,,

भावना और जज्वात की दवा है कहाँ ,,,,

संवेगनाओं का तूफान वे हवा है कहाँ,

ऐसा कोई देश नहीं ,जो आबाद रहा हो ,,,

चाहत और रुसवाई किस दामन मे नहीं है ,,

खोलकर देखो पिटारा , चित्र खुद दिख जायेगा ,

,काली कमली वाले का ही नूर दिखेगा,,,,,

दुनिया मे तेरा नित ही दस्तूर दिखेगा ,,,,

गुरुवार, 19 सितंबर 2013

व्यभिचारिन पड़ोसन धमाल कर गयी ,,,,



व्यभिचारिन पड़ोसन धमाल कर गयी ,,,,

राह चलते मुसाफिर को बीमार कर गयी ,,

सोच कर गर कदम ठहरी होती पड़ोसन ,,,

मुसाफिर भी मिलते, न इतने सितमगर

बेजानों से दिल की दुआ कर रही है ,,

व्यभिचारिन पड़ोसन शरम कर रही है

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

बेजानों की दुनिया मुहब्बत की आशा ,

तोहमत भरी जिंदगी का निराशा ,,

चाहत पर ऐसा करम कर गई है ,,

मासूक जिंदगी  मे कहर ढा    गयी है ,,,,

व्यभिचारिन पड़ोसन शरम कर रही है,,

===================

सोच  कर  गर  सितम,

 आंसू  बहते हैं  उनके ,,,

ज़ख्मों के उनके दवा क्या करोगे  ?

बेजानों से दिल की दुआ कर रही है ,,

व्यभिचारिन पड़ोसन शरम कर रही है


 

 



गुरुवार, 12 सितंबर 2013

मजहब के नाम पर कितना वोट लोगे ,,

मजहब के नाम पर कितना वोट लोगे ,,
, अपने जमीर से पूछों खुद को कितना नोच लोगे ,,
, धर्म और जाति को बदनाम न करो
जिस माँ के गर्भ मे पले उसे तवाह न करो ,,,,
मजहब के नाम पर कितना वोट लोगे ,,,
जिस माँ के सिंदूरों की लाली ,,
मिट जाती तेरे वोटों से ,,
क्या जाकर दोगे तुम जबाब ,
 मिट  जाता  उनके ख्वाबों का आफताब ,,
ममता की आँचल का चिराग ,
मानवता करती नित विलाप ,
क्रन्दन करता है आफताब ,,,
बुझ जाता माँ के आंचल का चिराग ,,
 व़हाँ जाकर दोगे क्या जबाब ,,,,
कितना हलाहल भर दोगे,
अपने पराये आंचल मे ,,,
मानवता का त्राहि -त्राहि होता है तेरे आँगन मे ,,
कितनी विषधर है राजनीति ,, उससे विषधर है राजदंड,,
मजहब के नाम पर कितना वोट लोगे ,,,
फिरंगियों की तरह देश को बर्बाद ना करो ,,
मजहब के नाम पर कितना वार करोगे ,,
भाईचारे को कितना नीलाम करोगे ,,,,
मजहब के नाम पर कितना वोट लोगे ,,,,,,,,,,

अपनी माँ के आंचल कितना दाग भरोगे ,,,
मजहब के नाम पर कितना वोट लोगे ,,,,,,,,,,

अपनी माँ के आंचल में  कितना दाग भरोगे ,,,

ए राजनीति के मुसाफिर सोच लीजिये ,,

मजहब के नाम पर न धमाल कीजिये ,,,

खुद जीओ और दूसरे को जीने एहसान कीजिये

जो दे रहे हो दर्द उसका एहसास कीजिये ,,

रविवार, 8 सितंबर 2013

प्रजातंत्र की कलमी डाल ,,,,


प्रजातंत्र  की  कलमी   डाल ,,,,
 लुटे  खाएं  रहें आबाद
प्रजातन्त्र  की  कलमी  डाल ,,,
 डाल  - डाल पर  कोटि   घोसला ,,
 बिनु  मालिक  का   रचे   चोचला ,,,
प्रजातंत्र  की  कलमी  डाल ,,,,
नाम  से एन  कर   समझा  हाल ,,,,
लूट -खसोट  करें  नित  चर्चा ,,
वाह  प्रजातंत्र  की  कलमी  डाल ,,,
 जनता  इनसे  है  बेहाल ,,,,
प्रजातंत्र की  कलमी डाल ,

नोट  वोट  से  नेता  बनते ,,
जन -जन  को  धीरे   से   ठगते ,,,,
वाह   राजनीति   की  कलमी   डाल ,,
प्रजातंत्र  की  जनता   कैसी ,,
सावन  -भादों  की   वर्षा   जैसी ,,,,
प्रजातंत्र  की  कलमी  डाल ,,,,

नरक लोक मे तरकारी [व्यंग ]

नरक  लोक  में   भा  सम्मलेन ,
चर्चा  भई   तरकारी
आलू  और  टमाटर   टिंडा ,
बैगन  और   करेला    भिंडा ,,,
 परवर  ,मटर  पटल   सब  बैठे ,,,
नरक  लोक  में  भा   सम्मलेन
बैठे  सब   तरकारी ,,,,,,,
गाजर  मूली  और   चुकन्दर ,
पालक   मेथी  गोभी  अंदर ,,,
नेनुआ  और   तारोई   बोले ,,,,
काकर  खीरा  का  मन  डोले ,,,,
शिमला   सेम  अलग  ही  बैठे ,,,
मिर्ची  कुछ  तीखा ही    बोले ,,
कोहड़ा  , लौकी   कटहल  ठनके ,
चौराई  निकली   बन  ठन  के ,,,,
 केला  और   पपीता   दिखले ,,
 लहसुन  और  ,प्याज   भी  बैठे ,,,
अगले -बगले  आसन ,,,,
सुरन  औ   मशरूम   भी   आये ,,,
उनकर   नेक  इरादा ,,,,
 तन  करके  कादा [प्याज] जी ,
बोले ,,
हम  हैं  सब  के   राजा ,,
मान  लो  हमारी  बात ,,
  बहुत     दिन   देहा  तू  झांसा ,,
कांदा  का  तेवर  देख  कर  उठले ,,,
तभी  बटाटा [आलू ] दादा ,,
शान्त  हो   जाओ  प्याज  राज
 अब  तुम्हीं   बनोगें   राजा ,,,,,
नरक  लोक  में  हुई   तब  चर्चा ,,,
आज  से  कांदा   राजा ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,






गुरुवार, 22 अगस्त 2013

पलाश के फूल

पलाश के फूल 
तुममे क्या नूर ,, ,
बसंतकाल भी कितना 
रमणीक है 
तेरे पुष्पों में 
रक्त वर्ण की क्या तस्वीर है ,,
सुन्दर फूलों का प्रमुख वृक्ष ,,,
होली के रंगों का पलाश ,,,,
पृथ्वी के आँचल का गुलाब ,,,
पथिकों की चाहत लाजबाब
देख पुष्प मोहे मन राही ,,,,
हे पलाश क्या नूर है तुममे ,,,
ब्रह्मा ,विष्णु महेश ,,
विराजे ,,,,,
मदन देख उत्कंठा मोहे ,,
जन -जन का आकर्षण होवे ,,,,,
पल्लव धूसर रेशम रोयां ,,
त्रिपल पत्तिका जन -जन मोहे ,,,,
उत्तम कुल का पुष्प पलाश ,,
जीवन का सच्चा अनुराग ,,,,,
कवियों के दिल का है तू राज ,,,
राज भी कहता वाह पलाश ,,,,,,

मंगलवार, 20 अगस्त 2013

क्रिमिनल का बनवा नेता ,

क्रिमिनल   का  बनवा  नेता ,
                             ई  देशवा   चमकि  जाये ,,,,
गुंडागर्दी  भी  नित   होवे ,,,,
                फौलाद   झलक   जाये ,,,,,
करिहें  ओ  बात   तूफानों  से ,,,
                            हैवान  चमकि   जाए ,,,
घर  की  बात  रजधानी  जाये ,,,,
                                    ऊ  बात   न्यूज साईड     छाये ,,,
पहले   कुश्ती  औ   लठ्ठों  से ,  
                              पहलवानी  ये दिखलाते  थे ,,,
बदल  गया  अब  नेक  ज़माना ,
                      छर्रे  से  काम   चलाते   हैं ,,,,
छलनी  कर   देता  उनका   सीना ,,,,
                                   मुछों   पर   ताव   दिखाते   हैं ,,,
गली -गली  चौवारों   में ,,,
                                   नेता  जी  नजर  ही  आतें  हैं ,,,,,
 नेता  और  उपनेता में ,,
                                अभिनेता  नजर   आता   है ,,,,
मै   सोचता   हूँ  काश  ये ,
                                 फिल्म   में होती ,,,,तो=
डान  नजर   आता ,,,
                           कुर्सी  पर   बैठें  तब नया   पहलवान   ,
  नजर   आते ,,,,
[२]
कुर्सी   की   ममता   में ,,,,
                                 परेशान  रहें  नेताजी ,,,
राजनीति  के  गलियारें  में ,,,
आबाद    रहे   नेता   जी ,,,,,,
                              भावना  और  जज्बात  इन्हें ,,,,
लावे  न   ववंडर ,,
                   वाह हमरे       नेता   का   बड़ा   है   कमंडल ,,,,,,
पैसा   भरिके   लड़े  चुनाव
                               ठेका  बेचे  धान  के भाव ,,,
पैसा  कैसे   करे   इकठ्ठा ,,,
                               इ   नेता  का  काला  चिठ्ठा ,,
गली -गली  चौराहे का ,,,
उप  नेता   हरवाहे   का ,,,
                                  उप नेता  का  अख्खड़  काम ,,,
लेहि  वसूली  नेता नाम ,
                        एंडर -टेन्डर  उनके  नाम ,,,
नेता  जी  का  लेटर   काम ,,
                                      मुख्य  विकाश  अधिकारी  देखै ,,,
खड़ा   अहेन  तेवारी   देखै ,,
                            दुवा  और  तब  भवा  सलाम ,,,
उपनेता  का  होईगा  काम ,,,
                       लाईन  में परेशान  है  जनता ,,,
आखिर  अधिकारी   क्यों  गिनता ,,,
                               नेता जी  को  दिया  जो वोट ,,
 हे  वोटर [जनता ]  तेरी  है  खोट ,,
                               [३]
जनता  मन  मायूस  ,
क्यों  रहता ,,
                  नेता  जी  से है  जो  रिश्ता ,
मान  भाव  सम्मान
                           सृजन  भी ,,
 यह  क्या  दस्तूर   बनी   नेता  जी ,,,
                                       चमचों  से   जनता  हैरान ,,,
चाटुकार  की  लाटरी ,
                    जनता  का  है   खून ,,
पिचकारी   से  खेलते ,
                      नित  होली  का  जनून ,,,,
हिन्दू  का  होली  हुआ ,,
                    मुसलमान  का ईद ,,
 सद्भावों  के  सृजन  का ,
                                इनको   नहीं   सीख ,,,,
जाति -पाति  का   चौसर  फेकें ,,
                                        नोट  वोट  की  नीति ,,,,
वाह   हमारे  नेता ,,जी ,,
                                    क्या  जनता  से प्रीति ,,,
कूटिनीति  से  काम  करें  ये ,,,
                                  धर्म वाद  की  भाषा ,,,
वाह  हमारे  नेता जी ,,,
                                बहुत  देहा  तू  झांसा ,,,,,,
                                      

सोमवार, 19 अगस्त 2013

रक्षाबंधन

रक्षाबंधन का पावन पर्व आप सब सभी ब्लागर बंधु , कामेन्ट करने वाले और सभी पाठक बंधुओं के जीवन को नयी दिशा प्रदान करते हुए सद्मार्ग ,उन्नति आरोग्यता और विजयश्री प्रदान करें ,,,,

,रक्षाबन्धन भारतीय संस्कृति का प्रमुख पर्व है , यह पर्व भाईचारा , विश्वबंधुत्व का संदेश देते हुये आत्मविश्वास ,और बहन की रक्षा का दृढ संकल्प का परिचायक है ,,, आज वक्त के साथ हर धर्म के लोग यदाकदा बहन - भाई के दृढ प्रेम की मिसाल के रूप मे मनाते हैं ,, पर्व सद्भाव की मिसाल होती है ,,,,

रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है ,,,, हिन्दू धर्मशास्त्र मनुस्मृति के अनुसार इसे चार वर्णों में विभाजित किया गया है ,,,,,
ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य , और शुद्र ,,,,, ठीक उसी प्रकार हिन्दुओं के चार प्रमुख त्यौहार हैं ,,,, क्रमश ; श्रावणी [ रक्षाबंधन ] दशहरा , दीपावली और होली ======
रक्षाबंधन कब से मनाया जा रहा इस परम्परा की शुरुवात कब हुई ,,, प्रश्न का प्रश्न बना हुआ है,,, हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार[ भविष्य पुराण ] देवासुर संग्राम में देवताओं की विजय के लिए इन्द्रनी [ इन्द्र की पत्नी ने ] देव गुरु वृहस्पति द्वारा अभिमंत्रित कच्चे सूते [राखी] को बंधा ,,, उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी ,,, तद्पश्चात देवासुर संग्राम में देवराज इंद्र की विजय हुई ,,,,, श्रीमद देवीभागवत के अनुसार भगवान् विष्णु ने हयग्रीव का जन्म
लेकर वेदों की रक्षा की ,,,, वामन अवतार में राजा बलि की परीक्षा फासं में फसे भगवान नारायण की मुक्त कराने के लिए माँ लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधकर अपने पति भगवान् नारायण [विष्णु ] छुडाया ,,,,
भगवान् सदैव अपने भक्त के आधीन होते हैं ,,,,,,

उस दिन भी श्रावण मॉस की पूर्णिमा थी ,,,,,

येनबध्दो बलि ; राजा दानवेन्द्रो महाबल.;

तेन त्वामभि बध्नामि रक्षे माचल मा चल;

द्वापर में युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में कृष्ण द्वरा चेदिराज शिशुपाल का वध करते समय अंगुली कट जाने से द्रोपदी
द्वारा अपने साड़ी का आँचल फाड़कर कृष्ण की उंगली में बंधा उस दिन भी श्रावण मॉस की पूर्णिमा थी ,,,
उनकी रक्षा स्वरुप दुशासन द्वारा चीर हरण करने पर भक्त वात्सल्य भगवान् कृष्ण नंगे पाँव आकर
अपनी बहन की रक्षा किये , दस हजार हाथियों के बल से युक्त दुशासन विषमय में किंकर्तव्य विमूढ़ होकर
सोचने पर विवस हो जाता है ,,,,

साड़ी बीच नारी है कि नारी बीच साड़ी है ,,,,,[भ्रमक अलंकार ] का भ्रम उत्पन्न होजाता है ,,,,

राजपूत महारानी कर्मवती ने मुग़ल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजकर अपने देश रक्षा की मांग की थी , और हुमायूँ ने गुजरात के शासक बहादुर शाह से उनके देश की रक्षा की थी ,,,,
सुभद्रा कुमारी चौहान ने बड़े मार्मिक शब्दों में काव्यमय अंदाज में === लिखा है ,,,
वीर हुमायूं बन्धु बना था ,,,,
विश्व आज भी साक्षी है ,,,
प्राणों की बजी रख जिसने ,,
राखी का पत राखी है ,,,,
यही चाहती बहन तुम्हारी ,
देश भूमि को मत बिसराना ,,
स्वतंत्रता के लिए बंधू ,
हँसते -हंसते मर जाना ,,,,,,,
सिकंदर महान की पत्नी द्वारा राजा पुरु को राखी भेजकर सिकंदर के प्राणों की रक्षा की मांग की थी ,,,
राष्टीय स्वयं सेवक संघ पुरुष सदस्य परस्पर भगवा कच्चा धागा [राखी ] बांधकर परस्पर प्रेम का इजहार
करते हैं ,,,, भारत के राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री के आवास बच्चों द्वारा राखी बंधा जाता है ,,,
कालांतर में यह पर्व भाई -बहन के मधुर संबंधो डोर बन गयी ,,,,, श्रावण मास की पूर्णिमा को सुबह स्नान के उपरान्त बहन द्वरा भाई के दाहिने हाथ रोली अक्षत कुमकुम के साथ राखी बांधकर भाई के लम्बे उम्र उन्नति
शुभाशीष प्रदान करती हैं ,, और भाई अपनी बहन यथाशक्ति द्रव्य के साथ बहन की रक्षा का वचन देता है ,,,,,
महाराष्ट्र में समुद्र वरुण देव को नारियल अर्पण करना , भारत के बिभिन्न राज्यों में नाना प्रकार की
परम्परायें है ,, ब्राह्मणों द्वारा यजमानों को रक्षा सूत्र बांधना ,,,,नाना प्रकार के पकवान अपनी परंपरा के अनुसार बनाते हैं ,,,,,
आज वक्त के साथ-साथ धीरे धीरे सभी परम्पराएँ कलुषित होती जा रही हैं ,,, आधुनिकीकरण , समय का आभाव , रिश्ते के बदलते रंग प्रयोजन वाद का उदय ,, आदर्शवादी ,प्रकृति वादी परम्पराओं का ह्रास हमारे अभिसमयों [परम्परा ]
का अस्तित्व बिखरता जा रहा है ,,,,,,
राखी तेरा कोई मोल नहीं है,,,

बहना तेरे प्यार का तोल नहीं है ,,,
तेरे आशीष का कोई जोड़ नहीं है ,,
उसके आगे नतमस्तक दुनिया के दस्तूर सभी हैं
अतुलनीय नेह है भाई -बहन के प्यार का ,,

भावनाएं भी होती कायल ,, इस पर्व का

शनिवार, 10 अगस्त 2013

विरहन की बेदना


सावन का  महीना  क्या  होता ,,,
 विरहन की  बेदना  से पूछो ,
झंझावत   तूफानए क्या  भरती  है ,
वारि  भरे  अम्बारों  से ,
सागर की लहरों  से  पूछो ,
ज्वार  और  भाटा  मे क्या  है ,
कैसे  भरती  हैं  जलधारा ,
विरहन  की आंखो  मे देखो ,
भाव  बृहद   उत्कंठित  होता ,
 चाहत  की   आकांक्षा  मे ,
हुई  वेदना  नागमती  को ,
पद्मावत के  खण्ड  काव्य सी ,
मधुबन छोड़  गये  जब  कान्हा ,
गोप -गोपिका  तन-मन  कान्हा ,,
 रिमझिम -  रिमझिम  बहे  फुहार ,,
विरहन  के तन लागे  आग ,,,
 रिमझिम -रिमझिम  की बरसात ,,
सावन  की  गति   ,विरहन  जाने ,
 भादों  वह  काली  रात ,,
मेघ  भी  गर्जन  करता  रहता ,
सहम  जाय  रजनी  का  साथ ,,
नभ मंडल पर  शशि नहि दिखते ,
तारागण  भी  भूले  रात ,,,
रिमझिम -रिमझिम  की  बरसात ,,,
बीत गयी  रजनी का  साथ,,
तेरी  बेदना  इतनी  क्यों  है ,
सावन -भादों  की  छवि
जो  है ,,,,,

शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

देश धारहु -धार जात बा ,,,

 हमारे  परम  प्रिय  मित्र  लालमणि  यादव  जी के मुखारविन्दु  से  कलमबद्ध  कविता
आपके  सामने   लिख    रहा  हूँ ,,,==============================



भ्रष्ट  लोकतंत्र  में  प्रतंत्र  सब  लोग  हैं ,,,
                                     स्वतंत्रता  के नाम  पर  कलंक   लागि  जात   हैं ,,
जाति  -पाति   क्षेत्र वाद   भाई  और  भतीजा  वाद
                                               पुत्र  और पत्नी  का वाद  सबहिं  को खात  बा ,,,
 रस  और  मलाई  में  भलाई  सब  देख रहे ,,
                                            मानव  में मनुजता  का रूप  न  देखात  बा ,,
आया  जवान  का ज़माना , चले  बूढ़  का  कहा  ना ,,
                                          माई  -बाप  भय  बेगाना , ऐसा  देश  में देखात  बा ,,
बही  पश्चिमी  बयार  , इज्जत  खाई  लहेस  मार
                                          सब  किये  स्वीकार , देशवा  धारहु  धार  जात  बा ,,
मजा  मारे  घूसखोर  घूमे   चौराहे  पर  चोर ,,
                                          चोर  पर ,मंत्री  के  हाथ , दिल्ली  में देखात  बा ,
मानव  में मनुजता  का  रूप  न  देखात  बा ,,,
                                          देश  धारहु  -धार  जात  बा ,,,

सोमवार, 5 अगस्त 2013

हे सावन तुम कब आओगे ,

रिमझिम -रिमझिम  वारि  की धारा ,,
तन-मन  पुलकित  वारि  है  न्यारा ,,,
मन मयूर  पुलकित  कर  गुंजन ,
वारि  विमल  धारा  सम  संगम ,,,
पावस   ऋतु  आगमन  सुहावन ,
मानव  मन  हिय  अति  मनभावन ,,
ग्रीष्म  तपित धरती  कर  क्रन्दन ,
कब  आओगे  ग्रीष्म  निकंदन ,
  तुम  बिनु  धरती  व्यथित   है  कैसी ,,
जल बिनु  मीन  व्यथा  है  जैसी ,,
अद्रा नखत  पुनीत  सुहावा ,,
मेघ  वारि  घनघोरहि आवा ,,
जल  सम सृष्टि  विलय  
होजैसे ,
 जल बिनु   जड ,चेतन  गति  वैसे ,,
नीर परम् वह  तत्व  अनूपा ,
जड ,चेतन , सद्गति  जलरूपा ,,
सावन्  मास पुनीत  सुहावा ,,
श्रावण मास शिव  के  मन भावा ,,
बोल बम का  गुंजन  होवे ,
शिव महिमा जन -जन को मोहे 
बोल  बम का  गुंजन  होये ,
मोर  मयूर  मन  नाचन  लागे ,
पिक,  कोयल  दादुर की  बोली ,,,
हरियाली  मय   धरती  बोली ,,
तू  है  मेरे  दिल  का  ताज ,,
हे  सावन  तुम पर  है नाज ,,,,
हे  सावन  तुम पर  है नाज ,,,,
हे सावन  तुम  कब  आओगे ,
मन  का  भाव  जगा  जाओगे 
हे सावन  तुम  कब  आओगे 

रविवार, 4 अगस्त 2013

राजनीति

  

नारायण  के  वच्छास्थल   से  निकली  हुई   राजनीति  को नमन  करता हूँ ,   हे राजनीति   तुम  सम्पूर्ण  ब्रहमांड  की  जननी   हो ,

 प्रत्यक्ष  या  परोक्ष  रूप  से  आपके  चक्रव्यूह  से  कोई  नहीं   बचा  है , आज  सूफी  संत , महात्मा , धर्माधिकारी , आपके  
आधीन  हैं ,  धर्म भी  आज  आपकी  चौखट  का पहरेदार  बन चूका  है ,,,   नेताओं  का काम  नेतागिरी  करना  है ,,,  पहले  गांधीगीरी  ज़माना  था ,,  नम्रता , सद्भाव ,अहिंसा    उनके  आभूषण  हुआ  करते थे ,,,  आज  कल  के  नेताओं  से  प्रदुषण 
हुआ  करते  है ,,, आज  हमारे  भारत  के  ज्यादातर  नेता  जेलखानो से लेकर  मर्डर , बलात्कार ,  हिंसा  जैसे  अद्वातीय 
कारनामों  के  मुरीद  हो चुके  हैं ,  वोट  और  नोट  की प्रतिस्पर्धा  उन्हें  उस  पायदान  पर  लाकर  खड़ा  कर दिया ,  जो  उनकी 
 अस्मिता  पर  बदनुमा  दाग  है ,,,  फिर   भी  हमारे  नेता  जी  बेदाग़  हैं ,,   कड़क -  काजी  श्वेत  परिधान  की    चमक  उनकी 
बेदाग़ पन  का     शंखनाद  है , काले  कारनामों  के लिए  मशहूर  नेता  जी  समाज  के  आदर्श  होते है ,,,
अब  हम  उत्तरप्रदेश  की  राजनीति  की  बात  करते  हैं ,,  वहाँ  सपा  में यूपी   एग्रो  के  चेयरमैन   नरेन्द्र  भाटी   जी है ,,,  आजकल  उनके  काम  के कारनामे  भारत  के  न्यूज चैनल  से लेकर  समाचार  पत्रों   की  रौनक  बनाए  हुए हैं ,,
४ १  मिनट  के  कारनामों   की  धमाल  सुनकर  मुझे  आश्चर्य  होता   है ,  क्या  हमारे  देश  का  लोकतंत्र  यही है ,,
 फिर  मै  सोचता  हूँ ,  ये  लोकतंत्र  नहीं   नेतागीरी  है ,, एक  सज्जन  हमसे   पूछे   यूपी  में नेतागीरी  बहुत  है 
 हमने  कहा    वहाँ  सीट  ज्यादा  है ,,  नरेन्द्र  भाटी  का  नाम  नहीं  सुना  था ,,,
तभी  सम्पूर्ण   भारत  बच्चा -बच्चा   सुन  रहा  है ,,  ४१   मिनट   का  कमाल ,,,
 गिनीज  बुक  की  टीम  भी  समीक्षा  करने  के लिए  आने  वाली  है ,,,,
वो  किसलिए 
उनका  काम  क्या  है ,,
अदभुत  कार नामों  का  पंजीकरण  करना ,,,
कौन  बुला  रहा  है ,,,
न्यूज  चैनल  , से लेकर  समाचार  पत्र  वाले  खबर  छाप -छापकर  आने  के लिए  मजबूर  कर देंगे ,,
वाह  मिडिया ,,
गौतम  बुद्धनगर  की  धरा  पर अहिंसा  के पुजारी   गौतम  बुद्ध  की  अहिंसा , के  क्षेत्र  में   हिंसा  का  रूप  देने वाले नेता 
उन्हें  धर्म  से ज्यादा  रेत  माफियाओं  से लगाव  है ,,  इसे मस्जिद  से जोड़कर  साम्प्रदायिकता  का  बीज  बोना 
जनता  को  गुमराह  करना  है ,,  सरकारी  जमीन  पर मस्जिद  बनाना ,,  नेताजी द्वरा  चन्दा  देना  , शिलान्यास  करना 
क्या  है ,,, 
नेता  होकर  सरकारी  जमीन  का  धार्मिक  अधिग्रहण  करना ,,,,  क्या  एक  सोची समझी  राजनीति  नहीं है ,,,,
आई  ए  एस  एस डी  एम्  दुर्गा शक्ति  नागपाल का रेत  माफियाओं  पर कार्यवाही  का  प्रतिशोध  था 
ईमानदार  सशक्त  युवा  महिला  अफसर  को  निलंबित  कराना ,,,  उनकी  हार   और  हताशा  का    नतीजा  था ,, 
प्रसन्नता  का  इजहार  ४ १  मिनट  का  सस्पेंड  आर्डर  था ,,,,
जो उनकी  भूल   थी ,
जो  उन्हें  न  उगलते  बन  रहा  है  , न  निगलते ,,,,
हार  और  प्रतिकार  स्वरूप  नेताजी  आशय  को  वेआशय   बताते  हैं ,,,,,
आजकल  के नेता जी  आवेश  में  कुछ  भी  बोल्  देते हैं , 
कांग्रेस  की  दिग्विजय  जी  उनके कामेन्ट  सदैव  चर्चे  में रहे  हैं ,,,
महाराष्ट्र   के वरिष्ठ  नेता  अजीत पवार  ,  समाज  सेवक  देशमुख   द्वरा  पानी की  मांग  पर  अभद्र  टिप्पणी  
से  चर्चित  रहे  हैं ,, 
नेताओं  द्वारा  एस  आई  को पीटना ,  झगडा  करना ,,, 
 आदि  नेता  वृत्तांत  को  परिसीमित  नहीं  किया   जा  सकता 
 नेता  जी  हैं  आवेश  में आये   , भूल  हो  गयी ,,
जनता  की  चाहत  चकना  चूर  हो गयी ,,,,
हर दल मे ही दलदल है ,,, तभी तो देश मे हलचल है ,,,,,
दुर्गा शक्ति नागपाल आप के कार्यकुशलता , साहस पर हमे गर्व है ,, झुकी नहीं बैरी के गढ मे , कितने आये होंगे वार ,, करती रही कर्म की रक्षा , नही प्रत्यर्पन उसकी इच्छा ,,, ,
दुर्गा शक्ति नागपाल=
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर युवा अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल के साथ गलत व्यवहार ना हो ,, केन्द्र और राज्य आपसी बातचीत से मामले का हल निकाला जा सकता है ,,,, हल न निकलने की स्थित मे केन्द्र सरकार को सर्विस रूल्स के अनुसार 45 दिन तक इंतजार  करना होगा ,,,,,,, यूपी मे नौकरशाही नही , नेतागीरी चलती है ,,,, यूपी की राजनीति से अग्यान दुर्गा शक्ति नागपाल , रेत माफियाओं के दुर्ग को ध्वस्त कर दिया , नरकासुर [भौमासुर ] जैसे अजेय दुर्ग का दुर्गा द्वारा भेदन दुसह हो गया ,, सरकारी राजस्व के नुकसान को बचा कर दुर्गा कोई गलत नहीं किया , इसे राजनैतिक दृष्टिकोण चश्मे से बाहर आकर देखना चाहिये ,, राजनीति करना नेताओं का काम है ,, जनता सिर्फ न्याय चाहती है ,,, युवा राजनेता अखिलेश यादव की जीत पर मुझे गर्व था ,, काश यूपी की राजनैतिक सोच बदलेगी ,, लेकिन राजनीति के मझे महारथी के सामने विवस अखिलेश यादव को देकर विषाद होता है ,,,,, वह अपने विवेक का उपयोग कर सकें ,,,,,,
वाह राजनीति गजब् की चीज है तू,,
दुनिया के धुरंधरों की समशीर है तू,,,,,,
वक्त बेवक्त की तस्वीर है तू
चाहत से बढ़कर , जुदाई की जमीर है तू,
, दुनिया की खूबसूरती की तस्वीर है तू,,,,,,,
तेरी महिमा को क्या लिखूं कलम के निशाने से ,,
अपने को भी नहीं बक्सा राजनीति के मयखाने से,,,,,,,,
नेता आरती सुरक्षा कवच है , अर्जुन के तीब्र बाण भी नहीं भेद सकते , कर्ण के कवच कुंडल के समान है ,,,, कलियुग नेता महामंत्र से ना जाने कितने की भाग्य रेखाएं बद्ल गयी , दसम ग्रह शान्ति महामंत्र का जाप करने वाले लोगों से आप परिचित ही होंगे ,,,,
ॐ  जय  नेता  देवा ,,
जो जन  करते  तुम्हारी  सेवा ,,,
क्लेश  विकार  उन्हें  न  होवे ,,
सुख  सम्पति  चढ़ते  सब  मेवा ,,
ॐ  जय -जय  नेता  देवा ,
भक्ति  -भाव  से  करे  जाप  जो ,
उनके  कष्ट  को हरते  आप  हो ,,
जो  जन  उनको  त्रास  देत  हैं ,,
उनको  आप  श्राप  देत  हैं ,,,
मन क्रम  बचन  करे  जो सेवा ,
 चिरंजीव  खावे   नित  मेवा ,,,,
 ॐ  जय  जय   नेता देवा ,,
आपकी  महिमा  जो नित  गावै ,
दस  ग्रह  ताहि  निकट  नहिं  आवै ,,,,,,
आप  सोचते  ग्रह  दस  क्या है ,,
नेता  से डरते  ग्रह  सब हैं ,,,,
शुक्र   शनि  भी  बने  अर्दली ,
गुरु  से मच  गयी  नयी  खलबली ,,
 सोम  और  ,रवि  गति  न  पावै 
जब  तक  नेत  महात्म्य    न गावै ,,//
ॐ जय -जय   नेता  देवा ,,,,,
 मंगल , बुध  शुद्ध  तब  होई 
जब  नेता  की  अस्तुति   होई ,,
  राहू  ,केतु  का   औकात ,,
जऊ  नेता  से  पावहि  पार ,,,,,
ॐ जय  नेता  देवा ,,
जन  जन  करता  आपकी  सेवा 
 ॐ  जय  जय  नेता  देवा ,,,,
मेरा  इरादा  किसी  नेता  का  अपमान  नहीं , बल्कि  यथार्त  से अवगत  कराना  है ,  दर्पण   सच्चा  मित्र   होता  है ,,,
सत्य  कडुआ  होते हुए  भी  न्याय  संगत  है ,,, लोकतंत्र  में जनता की भावनाओं  की  कद्र  करना  जनप्रतिनिधि  का 
दायित्व  है  , इस सत्य  से  बंचित  होना  , न्याय  संगत  नहीं , अब्राहिम  लिंकन  ने कहा  है ,,,  लोकतंत्र  जनता के लिए 
जनता  द्वरा  जनता  के ऊपर  शासन  है ,,,, ,,,, आप  जनता  [वोटर]  द्वरा  निर्वाचित  होकर  जन  मार्ग  से विमुख  होना 
आपकी  उदासीनता  का  द्योतक  है ,,,,, सभी नेता एक सरीखे नहीं होती ,, विशिष्ट विशेष नेता सदैव समाज के लिये आदर्श रहें है , हमे उनके आचार -विचार , कार्य करने की शैली , स्वार्थ से हटकर जनहित कार्य अविस्मरणीय रहे है ,
, शैले शैले न माणीक्यम् , मौतीक्यम् ना गजे -गजे,, साधु वम न सर्वत्र म चन्दनम् न वने-वने,,,,, आज आदर्शवाद , प्रकृतिवाद से मोहभंग करके प्रयोजनवाद का आकर्षण धन लिप्सा की चाहत शार्ट कट तरीके का उद्‌भव मानव मन की क्षीण मानसिकता का द्धोतक है ,,,
जय  हिन्द  , जय  भारत ,,,,,,