सावन का महीना क्या होता ,,,
विरहन की बेदना से पूछो ,
झंझावत तूफानए क्या भरती है ,
वारि भरे अम्बारों से ,
सागर की लहरों से पूछो ,
ज्वार और भाटा मे क्या है ,
कैसे भरती हैं जलधारा ,
विरहन की आंखो मे देखो ,
भाव बृहद उत्कंठित होता ,
चाहत की आकांक्षा मे ,
हुई वेदना नागमती को ,
पद्मावत के खण्ड काव्य सी ,
मधुबन छोड़ गये जब कान्हा ,
गोप -गोपिका तन-मन कान्हा ,,
रिमझिम - रिमझिम बहे फुहार ,,
विरहन के तन लागे आग ,,,
रिमझिम -रिमझिम की बरसात ,,
सावन की गति ,विरहन जाने ,
भादों वह काली रात ,,
मेघ भी गर्जन करता रहता ,
सहम जाय रजनी का साथ ,,
नभ मंडल पर शशि नहि दिखते ,
तारागण भी भूले रात ,,,
रिमझिम -रिमझिम की बरसात ,,,
बीत गयी रजनी का साथ,,
तेरी बेदना इतनी क्यों है ,
सावन -भादों की छवि
जो है ,,,,,
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