शनिवार, 10 अगस्त 2013

विरहन की बेदना


सावन का  महीना  क्या  होता ,,,
 विरहन की  बेदना  से पूछो ,
झंझावत   तूफानए क्या  भरती  है ,
वारि  भरे  अम्बारों  से ,
सागर की लहरों  से  पूछो ,
ज्वार  और  भाटा  मे क्या  है ,
कैसे  भरती  हैं  जलधारा ,
विरहन  की आंखो  मे देखो ,
भाव  बृहद   उत्कंठित  होता ,
 चाहत  की   आकांक्षा  मे ,
हुई  वेदना  नागमती  को ,
पद्मावत के  खण्ड  काव्य सी ,
मधुबन छोड़  गये  जब  कान्हा ,
गोप -गोपिका  तन-मन  कान्हा ,,
 रिमझिम -  रिमझिम  बहे  फुहार ,,
विरहन  के तन लागे  आग ,,,
 रिमझिम -रिमझिम  की बरसात ,,
सावन  की  गति   ,विरहन  जाने ,
 भादों  वह  काली  रात ,,
मेघ  भी  गर्जन  करता  रहता ,
सहम  जाय  रजनी  का  साथ ,,
नभ मंडल पर  शशि नहि दिखते ,
तारागण  भी  भूले  रात ,,,
रिमझिम -रिमझिम  की  बरसात ,,,
बीत गयी  रजनी का  साथ,,
तेरी  बेदना  इतनी  क्यों  है ,
सावन -भादों  की  छवि
जो  है ,,,,,

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