गुरुवार, 24 अक्टूबर 2013

छलिया छल भेष अनूप बनायो

संत असंत भी संत भये,
निर्भय सब काम विध्वंस भये ,,
परलौकिक लौकिक आज नहीं,
हर -युग मे दुर्जन रूप बनायो,, ,

भानुप्रताप नरेश रहे ,
यश कीर्ति जाके द्वार बसे
धर्म धुरंधर नीति प्रवीना ,,
छलिया छल वेश नरेश से कीन्हा ,

बिप्र न से अभिशाप दिलायो
छल विद्या ताहि विनाश करायो ,,
छल का रूप अनेक रहा
,लंकापति रूप अनूप बनायो ,,,

सीय हरे हरि नारि भिखारी ,
प्रगटे रूप नरेश बनायों
बल दम्भ कौन जो नारि चुरायो,,,,,,,
छलिया छल भेष अनूप बनायो ,,,,
यदि कलियुग संत असंत रहे ,,
व्यभिचार सदा सर्वांग रहे ,,,
विस्मय कैसा आडंबर ,,
दिखता ऐसा भूमंडल मे ,,

नृत्य और आडंबर करता ,
मीरा भक्ति का करे= दिखावा
जड जंगम जाने आडंबर ,,,
फिर भी भक्ती का चढ़ा कमंडल ,,,,

छलिया छल भेष अनूप दिखावा ,,,,,,,,
, वास्तविक संत कैसे हैं,
नाहिं मीडिया की छाया मे ,,
स्वारथ के वट बंध्य नहीं है ,,

जन हित उनके आदर्श रहें है ,
मानवता , दर्पण है उनका ,
परोपकार रग रग मे छाया ,,
स्वारथ के वॅट बंध्य नहीं है ,,,
नहीं मीडिया की छाया ,,,,,,,

रविवार, 20 अक्टूबर 2013

politics

  नारायण  के  वच्छास्थल   से  निकली  हुई   राजनीति  को नमन  करता हूँ ,   हे राजनीति   तुम  सम्पूर्ण  ब्रहमांड  की  जननी   हो ,
 प्रत्यक्ष  या  परोक्ष  रूप  से  आपके  चक्रव्यूह  से  कोई  नहीं   बचा  है , आज  सूफी  संत , महात्मा , धर्माधिकारी , आपके  
आधीन  हैं ,  धर्म भी  आज  आपकी  चौखट  का पहरेदार  बन चूका  है ,,,   नेताओं  का काम  नेतागिरी  करना  है ,,,  पहले  गांधीगीरी  ज़माना  था ,,  नम्रता , सद्भाव ,अहिंसा    उनके  आभूषण  हुआ  करते थे ,,,  आज  कल  के  नेताओं  से  प्रदुषण 
हुआ  करते  है ,,, आज  हमारे  भारत  के  ज्यादातर  नेता  जेलखानो से लेकर  मर्डर , बलात्कार ,  हिंसा  जैसे  अद्वातीय 
कारनामों  के  मुरीद  हो चुके  हैं ,  वोट  और  नोट  की प्रतिस्पर्धा  उन्हें  उस  पायदान  पर  लाकर  खड़ा  कर दिया ,  जो  उनकी 
 अस्मिता  पर  बदनुमा  दाग  है ,,,  फिर   भी  हमारे  नेता  जी  बेदाग़  हैं ,,   कड़क -  काजी  श्वेत  परिधान  की    चमक  उनकी 
बेदाग़ पन  का     शंखनाद  है , काले  कारनामों  के लिए  मशहूर  नेता  जी  समाज  के  आदर्श  होते है ,,,
अब  हम  उत्तरप्रदेश  की  राजनीति  की  बात  करते  हैं ,,  वहाँ  सपा  में यूपी   एग्रो  के  चेयरमैन   नरेन्द्र  भाटी   जी है ,,,  आजकल  उनके  काम  के कारनामे  भारत  के  न्यूज चैनल  से लेकर  समाचार  पत्रों   की  रौनक  बनाए  हुए हैं ,,
४ १  मिनट  के  कारनामों   की  धमाल  सुनकर  मुझे  आश्चर्य  होता   है ,  क्या  हमारे  देश  का  लोकतंत्र  यही है ,,
 फिर  मै  सोचता  हूँ ,  ये  लोकतंत्र  नहीं   नेतागीरी  है ,, एक  सज्जन  हमसे   पूछे   यूपी  में नेतागीरी  बहुत  है 
 हमने  कहा    वहाँ  सीट  ज्यादा  है ,,  नरेन्द्र  भाटी  का  नाम  नहीं  सुना  था ,,,
तभी  सम्पूर्ण   भारत  बच्चा -बच्चा   सुन  रहा  है ,,  ४१   मिनट   का  कमाल ,,,
 गिनीज  बुक  की  टीम  भी  समीक्षा  करने  के लिए  आने  वाली  है ,,,,
वो  किसलिए 
उनका  काम  क्या  है ,,
अदभुत  कार नामों  का  पंजीकरण  करना ,,,
कौन  बुला  रहा  है ,,,
न्यूज  चैनल  , से लेकर  समाचार  पत्र  वाले  खबर  छाप -छापकर  आने  के लिए  मजबूर  कर देंगे ,,
वाह  मिडिया ,,
गौतम  बुद्धनगर  की  धरा  पर अहिंसा  के पुजारी   गौतम  बुद्ध  की  अहिंसा , के  क्षेत्र  में   हिंसा  का  रूप  देने वाले नेता 
उन्हें  धर्म  से ज्यादा  रेत  माफियाओं  से लगाव  है ,,  इसे मस्जिद  से जोड़कर  साम्प्रदायिकता  का  बीज  बोना 
जनता  को  गुमराह  करना  है ,,  सरकारी  जमीन  पर मस्जिद  बनाना ,,  नेताजी द्वरा  चन्दा  देना  , शिलान्यास  करना 
क्या  है ,,, 
नेता  होकर  सरकारी  जमीन  का  धार्मिक  अधिग्रहण  करना ,,,,  क्या  एक  सोची समझी  राजनीति  नहीं है ,,,,
आई  ए  एस  एस डी  एम्  दुर्गा  नागपाल का रेत  माफियाओं  पर कार्यवाही  का  प्रतिशोध  था 
ईमानदार  सशक्त  युवा  महिला  अफसर  को  निलंबित  कराना ,,,  उनकी  हार   और  हताशा  का    नतीजा  था ,, 
प्रसन्नता  का  इजहार  ४ १  मिनट  का  सस्पेंड  आर्डर  था ,,,,
जो उनकी  भूल   थी ,
जो  उन्हें  न  उगलते  बन  रहा  है  , न  निगलते ,,,,
हार  और  प्रतिकार  स्वरूप  नेताजी  आशय  को  वेआशय   बताते  हैं ,,,,,
आजकल  के नेता जी  आवेश  में  कुछ  भी  बोल्  देते हैं , 
कांग्रेस  की  दिग्विजय  जी  उनके कामेन्ट  सदैव  चर्चे  में रहे  हैं ,,,
महाराष्ट्र   के वरिष्ठ  नेता  अजीत पवार  ,  समाज  सेवक  देशमुख   द्वरा  पानी की  मांग  पर  अभद्र  टिप्पणी  
से  चर्चित  रहे  हैं ,, 
नेताओं  द्वारा  एस  आई  को पीटना ,  झगडा  करना ,,, 
 आदि  नेता  वृत्तांत  को  परिसीमित  नहीं  किया   जा  सकता 
 नेता  जी  हैं  आवेश  में आये   , भूल  हो  गयी ,,
जनता  की  चाहत  चकना  चूर  हो गयी ,,,,
ॐ  जय  नेता  देवा ,,
जो जन  करते  तुम्हारी  सेवा ,,,
क्लेश  विकार  उन्हें  न  होवे ,,
सुख  सम्पति  चढ़ते  सब  मेवा ,,
ॐ  जय -जय  नेता  देवा ,
भक्ति  -भाव  से  करे  जाप  जो ,
उनके  कष्ट  को हरते  आप  हो ,,
जो  जन  उनको  त्रास  देत  हैं ,,
उनको  आप  श्राप  देत  हैं ,,,
मन क्रम  बचन  करे  जो सेवा ,
 चिरंजीव  खावे   नित  मेवा ,,,,
 ॐ  जय  जय   नेता देवा ,,
आपकी  महिमा  जो नित  गावै ,
दस  ग्रह  ताहि  निकट  नहिं  आवै ,,,,,,
आप  सोचते  ग्रह  दस  क्या है ,,
नेता  से डरते  ग्रह  सब हैं ,,,,
शुक्र   शनि  भी  बने  अर्दली ,
गुरु  से मच  गयी  नयी  खलबली ,,
 सोम  और  ,रवि  गति  न  पावै 
जब  तक  नेत  महात्म्य    न गावै ,,//
ॐ जय -जय   नेता  देवा ,,,,,
 मंगल , बुध  शुद्ध  तब  होई 
जब  नेता  की  अस्तुति   होई ,,
  राहू  ,केतु  का   औकात ,,
जऊ  नेता  से  पावहि  पार ,,,,,
ॐ जय  नेता  देवा ,,
जन  जन  करता  आपकी  सेवा 
 ॐ  जय  जय  नेता  देवा ,,,,
मेरा  इरादा  किसी  नेता  का  अपमान  नहीं , बल्कि  यथार्त  से अवगत  कराना  है ,  दर्पण   सच्चा  मित्र   होता  है ,,,
सत्य  कडुआ  होते हुए  भी  न्याय  संगत  है ,,, लोकतंत्र  में जनता की भावनाओं  की  कद्र  करना  जनप्रतिनिधि  का 
दायित्व  है  , इस सत्य  से  बंचित  होना  , न्याय  संगत  नहीं , अब्राहिम  लिंकन  ने कहा  है ,,,  लोकतंत्र  जनता के लिए 
जनता  द्वरा  जनता  के ऊपर  शासन  है ,,,, ,,,, आप  जनता  [वोटर]  द्वरा  निर्वाचित  होकर  जन  मार्ग  से विमुख  होना 
आपकी  उदासीनता  का  द्योतक  है ,,,,,
जय  हिन्द  , जय  भारत ,,,,,,
v

शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा चाँद अलौकिक
अनुपम छवि है ,
कृष्ण कला मय चाँद हुआ है ,,,
आज मनोरम,
सोलह कला परिपूर्ण हुआ है ,
अम्बर मे अह्लाद झलकता ,,
चाँद आज परिपूर्ण हुआ है ,,
अर्धचंद्र शिव मस्तक राजे ,,
शरद पूर्णिमा  अति शुभ लागे
शरद पूर्णिमा लक्ष्मी पूजन ,
स्वीकारें भक्तों का बंदन
नील गगन का पूर्ण चन्द्रमा ,
, शीत पवन के झोकें,
मलयागिरी सा अनुपम खुशबू ,
भर देता जन-जन में ,,,
अम्बर मे आह्लाद झलकता
आज चाँद परिपूर्ण हुआ है ,,

गुरुवार, 17 अक्टूबर 2013

दागी नेता बे फिकर रहो ,,

दागी नेता बे फिकर रहो ,,
मोर्चा हमने संभाल लिया है,,
ग्रहों की देखी तीव्र दशा ,,
संकट मोचन
कवच बनाय लिया है ,,,,
दागी नेता बे फिकर रहो,
मोर्चा हमने संभाल लिया है ,,,
नया आर्डिनेंस लायेंगे ,,
तर्क से उसे सजाएंगे ,,,
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को
बदल कर दिखाएंगे ,,,,
मै संसद हूं,,,
आप सांसद ,
कानून बनाना ,
मेरा काम ,
बना लेंगे नया कानून,,
आपका सहयोग
चाहिये सदन मे ,,,,,,,,,
जब बात हमारे
हित की ,
फिर चिंता है ,
किस बात की ,,,
कानून निर्मात्री सभा ने ,
दिया अभय वरदान ,,,
दागी नेता बे फिकर रहो ,,
मोर्चा मै ने संभाल लिया है ,
संसद देश की शान है ,,
उस पर हमे अभिमान है ,,,
जनप्रतिनिधित्व
कानून की धारा ,
जनप्रतिनिधि का
यही सहारा ,,,
रहें जेल
जन वोट न डाले,,
फिर नेता===================
चुनाव कैसे लड. डाले.,
, बात खटक गयी
न्यायालय को ,
माननीय न्यायालय ने
तुरंत किया निदान,,,,
सांसद जी हो गये परेशान,,
मानसून सत्र मे कर दिया,
उसका तुरत निदान ,,
अभय रहो नेता जी ,,,
हो गया है काम ,,,,
दागी नेता बे फिकर रहो
 मोर्चा हमने
संभाल लिया है ,,,,,,,
 --------------------------------------------------------
25 september2013= RAJKISHOR MISHRA
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 दागी नेता बे फिकर रहो ,,
मोर्चा हमने संभाल लिया है,,
ग्रहों की देखी तीव्र दशा ,,
संकट मोचन
कवच बनाय लिया है ,,,,
दागी नेता बे फिकर रहो,
मोर्चा हमने संभाल लिया है ,,,
नया आर्डिनेंस लायेंगे ,,
तर्क से उसे सजाएंगे ,,,
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को
बदल कर दिखाएंगे ,,,,
मै संसद हूं,,,
आप सांसद ,
कानून बनाना ,
मेरा काम ,
बना लेंगे नया कानून,,
आपका सहयोग
चाहिये सदन मे ,,,,,,,,,
जब बात हमारे
हित की ,
फिर चिंता है ,
किस बात की ,,,
कानून निर्मात्री सभा ने ,
दिया अभय वरदान ,,,
दागी नेता बे फिकर रहो ,,
मोर्चा मै ने संभाल लिया है ,
संसद देश की शान है ,,
उस पर हमे अभिमान है ,,,
जनप्रतिनिधित्व
कानून की धारा ,
जनप्रतिनिधि का
यही सहारा ,,,
रहें जेल
जन वोट न डाले,,
फिर नेता===================
चुनाव कैसे लड. डाले.,
, बात खटक गयी
न्यायालय को ,
माननीय न्यायालय ने
तुरंत किया निदान,,,,
सांसद जी हो गये परेशान,,
मानसून सत्र मे कर दिया,
उसका तुरत निदान ,,
अभय रहो नेता जी ,,,
हो गया है काम ,,,,
दागी नेता बे फिकर रहो
 मोर्चा हमने
संभाल लिया है ,,,,,,,
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25 september2013= RAJKISHOR MISHRA
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बेटी हैंकुल सेतु

बेटी कुल सेतु हुआ करती,
दो कुल इससे तर जाते हैं,,,
प्रेम ,स्नेह ,सद्भाव की गुड़िया ,
ह्रदय कमल खिल जाते हैं,,
सेवा और समर्पण इतना ,
बरबस सब झुक जाते हैं,,
बेटी कुल सेतु हुआ करती,
दो कुल इससे तर जाते हैं,,,,
बेटी सोम सुधा रस जैसी,
,मम्मी ,पापा के नैनो पलकी,,
आँगन की मुस्कान है बेटी ,,,
,सारे जहां की शान है बेटी ,,
प्रेम की निर्मल गंगा बहती ,,
जन -जन को आनन्दित करती ,,
बेटी कुल सेतु हुआ करती ,,
दो कुल इससे तर जाते हैं।
पुत्री कूलसेतु हुआ करती ,
 जब पुत्री पुत्री सी रहती ,,,,
मायके ससुराल की रौनक है ,
,बाबुल के आँगन की बिटिया ,,
चाहत की प्रतिमूर्ति सी गुड़िया
, ग्यान और विग्यान की सूरति,,,
दो वंशों की कुल गौरव है ,,
 प्रेम ,स्नेह धर्म आकांक्षा मूरति
बेटी कुल सेतु हुआ करती,
दो कुल इससे तर जाते हैं,,,

रविवार, 6 अक्टूबर 2013

ऐसा कोई देश नहीं जो आबाद रहा हो ,,,,

सा कोई घर नहीं बे दाग रहा है ,,,,

ऐसा कोई देश नहीं जो आबाद रहा हो ,,,,



ऐसा कोई  व्यक्ति नहीं जिसमे रोग नहीं है,,,

ऐसा कोई जीव नहीं , जिसमे भोग नहीं है ,,,

भावना और जज्वात की दवा है कहाँ ,,,,

संवेगनाओं का तूफान वे हवा है कहाँ,

ऐसा कोई देश नहीं ,जो आबाद रहा हो ,,,

चाहत और रुसवाई किस दामन मे नहीं है ,,

खोलकर देखो पिटारा , चित्र खुद दिख जायेगा ,

,काली कमली वाले का ही नूर दिखेगा,,,,,

दुनिया मे तेरा नित ही दस्तूर दिखेगा ,,,,