शुक्रवार, 21 मार्च 2014

होली की खुशियों की बधाई हो आपको ,

होली की खुशियों की बधाई हो आपको ,
प्रेम और नेह की सगाई दिखे आपको ,
खुशियों से भरी एक लुगाई मिले आपको ,
दिन मे सितारे नजर आयें सदा आपको ,
सूरज़ और चांद भी इंतजार करें आपका ,
खुशियाँ मे बेकरार रहें , नेह भरें आपसे ,

बुरा न मानो होली है =

बसन्ती बहार फागुए की खुमार
,सतरंगी रंगों की बहार ,
मस्तानी मद मस्त हवायें ,
नील गगन रंगीन आदाएं,
देवर -भाभी रंग मे झूमे ,
बुरा ना मानो होली है ,,
, पकवानों से सजी रसोई ,
रंगो की खुशबू है भीनी ,
लाल-गुलाल अबीर उड़े
,मन प्रेम का भंग सबहिं है नचायों ,
राज कहें अति राज की बात ,
भाभी देवर नेह रिझायों ,
प्रेम का भाव अजीब यहाँ ,
ममता अनुपम नव रूप दिखायो ,
देवर -भाभी का प्रेम परम् ,
चौदह भुवन बताय रह्यो 

रविवार, 16 मार्च 2014

रंग में भंग चढ़ा रग में

इंद्रधनुष के   सतरंगी   रंगों    को  ,
नयी    बहार   मिले ,
झूम  कर  भीगे   तन   मन  जन
, होली   की    खुशी अपार   मिले ,,/
चाहत   के   फूल   खिले   दिल    में ,
रंगों    का  नव   उन्माद    भरे ,
चाहत   हो  ऐसी   अलबेली
पिचकारी   से    रंग   की    होली ,
मदन   देख    मन   में    मुस्काये ,
हम   भी    खेलेंगे    होली ,
लाल गुलाल   अबीर   फुहारा
बृंदाबन   जन -जन   को  न्यारा ,
लठ्ठ  मार    के   होली  न्यारी ,
मन   में    लाल    गुलाल    पिचकारी ,
मथुरा बृंदावन   में   खेलें ,
राधा -कृष्ण   भी   होली ,
रिद्धि -सिद्धि   भी    होली  
खेलें ,
गणपति  को   रंग   रंग   में  होली ,
आप   भी   मन   से  खेलो    होली ,
भरें   गणेश    जी  आपकी   झोली ,
खुशी   रंग   रग   रंग   जाए
सावन   सी   हरियाली    रहे ,
भादों   सी   बरसात ,
क्वार  मास दशहरा    रहे
सदा   विजय   प्रतीक ,
कार्तिक   में   धन   झूम   के   बरषे ,
दीपावली  माँ   लक्ष्मी    हरषे  ,
अगहन  पूस , माघ की   ठंडी
फागुन   खुशियों  की   बरसात ,
कृषक   खुशी  में
 झूम   उठे ,
खलियानों  गूँज   उठे ,
सदा   ही   आये   फागुन   मास ,  रंगों  की
होये   बरसात ,,,
[२]
रंग   में  भंग   चढ़ा   रग   में ,
चहु   ओर दिखे    अंबर   नीला ,
मन  मयूर तरंग   रंग ,
बिहंग   कोकिल खरभरे ,
गजमुक्ता  मदमस्त   लगे   गज ,
मानों   भंग [भाँग ]   तरंग   उठायो ,
गर्जन   करता   सिंह   कहे ,
हम  भी   खेलेंगे    होली ,
फागुन   का   है   माह ,
लगे  सब   झूम    झुमैया
मीन  और   दादुर   भी   बोले
आ -रा   रा  ई   या ,
हम  भी   बोले   प्रेम   से
भाईया    होली    हअईया

राजनीति में चोखा माल

राजनीति नवनीति सुहावन, दल-दल सब अब लगे डरावण,
वोट नोट करते परिहास, अब नहि उनसे करिये आस,
कहे तुलसी नित शब्द सुहावन, ए लागिहें सब को मनभावन ,
कलियुग मे मसखरी जो जाना, सो नर को गुणवंत बखाना ,
नाचे -गावै छेड़े तान , जनता उनसे नित परेशान,,
रोज नवा कबोधन करते , जनता को नित -नित ही डसते ,,
माया का है जाल अनोखा , खाते नित सब चोखा -चोखा ,,
राजनीति मे भरे दलाल जनता को करते हैं हलाल ,
जनता बेबस फाँस फॅसी है , जैसे मछली जाल फंसी है ,,,,
राजनीति की ऐसी मार , बकरी शेर चले एक साथ,,
बकरी ,शेर चले एक साथ,फिर कैसे होता है राज ,
हर दल मे जब धड -धड होते , तभी तो सारे हलचल होते ,
राज कहें एक बात राज की , राजनीति परिहास आस की ,
सीट और कुर्सी के भूखे , नहीं वसूल -रसूल सरीखे ,,,,
मिली नहीं जब सीट भये , नेता जी दुखारी ,
क्रोध मे आकर नेता बोले , धीरे -धीरे पोपट खोले ,
इस दल मे सब भये दलाल , तभी तो हमरी ऐसी हाल,,
तीस साल सब भूल गयें है , पांच साल अब हाबी ,
देख रहे हो मिश्रा जी , आखिर कैसे बनाये लाबी ,,,

बड़े -बड़े सब ताकत रहिगे , बाजी मारें तिवारी ,
भन्नाएं सब नेता बोले ,क्या चाल चलें है तिवारी
RAJKISHOR   MISHRA [RAJ]  16/3/2014 

मयख़ाना



एक सिरफिरे ने आकर पूंछ लिया मुझसे ,
आखिर लोग मय खाने मे क्यों जाते हैं,
कुछ सोचकर मैने बोल दिया =
बदलते हुये जमाने की रंगशाला है मयख़ाना ,
दुनियाँ दारी की बीमारी का निजात मयख़ाना ,
धनुर्विद्या सीखने की कला है मयख़ाना ,
भूल जाते हैं लोग अपने अतीत को ,
कुछ खुशियाँ और गम के पुष्‍प जो खिले ,
लुटा देतें हैं पुष्‍प सारे , उस नील गगन मे ,
बजती रही शहनाईं उस नील गगन मे ,
तभी लगी रहती है भीड़ मैने आज जाना ,
तपाक से वह बोला ,,, क्या चीज़ है मयख़ाना ,
मैने सोच कर कुछ और बताता,
=काश गुनगुनाते हुये न आता ,,,
मयख़ाना बताया आपने मेरी दुनिया बदल गयी ,
गली -गली मे शबनम सी दिखती है यह दुनिया ,
मयख़ाना के प्यार से झूठी है यह दुनियाँ,
तारे भी तार से संगीत गुनगुनाते ,,,
धीरे -धीरे दुनियाँ मे चांद नजर आते ,
अनोखा अनुभव बताया मयखाने का ,
भूल से हमने बताया रास्ता मयखाने का...
RAJKISHOR    MISHRA  [RAJ] 

हिन्दी हिन्दुस्तान की शान हैं: मोदी

हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान की अस्मिता आज खतरे मे दिखाई दे रही है , हिन्दुस्तान मे अब हिन्दू भी सुरक्षित नहीं , चाहे वह मुज़फ़्फरनगर हो कश्मीर , राजनीति की बलि बेदी पर कुर्बान हो रहा है , आज राजनीति और राजनेताओं का कोई वसूल नहीं है , एक कहावत है वर मरे या कन्या पण्डित को दक्षिणा से काम ,,, आज हमारे राजनेता उसी नक्शे कदम पर चल रहे हैं ,,,, उन्हे समाज से ज्यादा अपने भविष्य को लेकर चिंता की लकीरें दिखाई देती है ,एक लोकोक्ति को सार्थक करने के लिये तत्पर रहते हैं , भा भिनसार बड़ी बिल खोदब,,,,,, न्यूज चैनल , न्यूज पेपर की खबरों पर दूरदृष्टि जमाये रहते है , कभी -कभी ऐसे कामेंट कर देतें है जिनका धरातलीय दुनिया से कोई सरोकार नहीं होता ,वोट और नोट की राजनीति मे अपने जमीर को भी गिरवी रख दिये हैं , उनकी अंतरात्मा उन्हे धिक्कारती है , यह क्या कर रहा हूँ, फिर भी धृतराष्ट्र बनने का ढोंग करते हैं ,,, राजनीति भी नुक्कत का खेल है ,शकुनि के पाशे अपने करतब दिखाने के लिये आतुर रहते हैं ,,,राजनीति राज्य और सरकार के अंतर्संबंधों का अध्ययन करती है , अब राजनीति राजनेता और वोटर विशेष निहित है प्रयोजनवाद सभी के सर पर चढ कर बोलता है , आज राजनीति मे गुंडेगर्दी और नोट का बोल बाला है ,, निर्वाचन आयोग कितना भी सक्त कानून बना दे , नेता जी उससे भी आंख मिचोली करने मे नहीं कतराते ,,हिन्दुत्व की रक्षा के लिये देश की आन -बान और शान हैं मोदी ,,,,,, सत्य और न्याय का प्रतीक हैं मोदी==
मोदी की बढ़ती हुई लोकप्रियता से त्रस्त सभी दलों को सिर्फ एक ही लक्ष्य दिखता है मोदी ,,,,मोदी विकाश पुरुष हैं , आज राजनीति के महारथी नित चक्रव्यूह बनाते है खुद के चक्रव्यूह मे स्वयंम् फंस कर हताश खिलाड़ी की तरह वार -पर वार किये जा रहें हैं,,,,,
मोदी प्रेम जगत सरनामा ,
कलुषित मन नाहिं राम का नामा ,,
कुटिल नीति खल रहे दुखारी ,
मन मे कबहुं कहाँ त्रिपुरारी ,
करहिं प्रेम सब ढोंग सयानी ,
नीति विरुद्ध नीति सम जानी ,
माया विवश ज्ञान नहि होई ,
ज्यों कामी विराग गति सोई /
वैसे जाल बुने दल-दल मे ,
कछुक ग्यान उभरे नहि मन मे ,

काशी महिमा अमित अपार ,

शारद शेष न पावहिं पार ,,,/

तीन लोक से बिलग है काशी ,

भोले , शिव बसते अबिनाशी ,,

तेहि नगरी मोदी चले हर्षित जन उल्लास ,

विजय गूँज जन -जन हिये

,मा भारती के लाल ,
गोपाल कवि ने काशी का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया है =
मंत्र महामणि विषय ब्याल के ,
मेटत कठिन कुअंक भाल के,
रामायण जब कही गोसाई ,

प्रगटन हित काशी फिर आई ,,,,

RAJKISHOR   MISHRA [RAJ] 16/03/2014