तेजी से बदल रहे भारतीय राजनैतिक परिदृश्य पर गौर किया जाय तब मोदी दिल्ली के लिये अपरिहार्य हैं , जन -जन का है एक ही नारा , मोदी भारत को है प्यारा ,,,,, आज मीडिया से लेकर जन -जन मे मोदी का बोलबाला है उत्तर भारत मे मोदी लहर अन्य विरोधी राजनैतिक पार्टी के लिये कहर सी बन गयी है , राजनैतिक घटक गठबंधन की रस्साकसी मे लगे है ,,,,,बढ़ती हुई मंहगाई ,बेरोजगारी ,कृषकों की आत्महत्या , शिक्षा का गिरता हुआ स्तर , भ्रष्टाचार और व्यभिचार ,,जवानों के साथ न इंसाफी ,,, लालबहादुर शास्त्री का नारा था , जय जवान जय किसान , , आज उसी कांग्रेस के राज्य मे किसान आत्महत्या कर रहे हैं ,,,,,,,भ्रष्टाचार का बोलबाला है , विदेश मे जमा काला धन की वापसी राजनैतिक विफलता का कारक बन चुका है , मेरा भारत देश , न जाने कितने बे ईमान ,,,,, फिर भी मेरा देश महान ,,,,, आज की राजनीति का स्वरूप बदल चुका है जिसका वास्तविकता से परे है , जन -जन को दिकभ्रमित कर रहा है ठीक उसी प्रकार से जैसे ====कागज के घोड़े सवार की मंजिल तय नहीं का सकते , कागज के फूल खुशबू नहीं दे सकते ,राजनीति एक ऐसाआखाड़ा है जहाँ वोट और नोट की प्रतिस्पर्धा उनके मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है, उससे कोई भी दल नहीं बच सकता , आज राजनीति मे स्वार्थ का बोलबाला है , टिकट ना मिलना , या सही जगह [मांगे गये ] से टिकट न मिलना राजनैतिक प्रतिस्पर्धा सबसे बड़ी बाधा है , ज्यादातर सीनीयर [वरिष्ठ] कार्यकर्ता टिकट और स्थान अपने मान का पर्याय समझ लेते हैं दल [ पार्टी ] की अपेक्षा अपने हित को सर्वोपरि मान बैठते हैं ,,,, राजनीति प्रतिद्वंदिता का वह मैदान है जहां स्वहिताय का बोलबाला रहता है , कभी -कभी प्रमुख नेता भी पार्टी के हाशिये पर आ जाते हैं , राजनैतिक युद्धय मे सब जायज होता है , मनुस्मृति मे कहा गया है - मत्स्य शासन प्रणाली मे बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है ,, वक्त का हर शय ग़ुलाम ,,,, समय की नजाकत और भाग्य की दशा को कोई नहीं बदल सकता , ग्रह की दशाएं और मनुष्य का भाग्य कोई नहीं जान सकता ,,,, आज मोदी चाय , नमो-नमो , हर-हर मोदी का शंखनाद जन -जन मे गूँज रहा है ,,,
गुरुवार, 10 अप्रैल 2014
हिन्दी ,हिन्दू , हिन्दूस्तान की अस्मिता खतरें मे ,,,,
हम गाँधी परिवार के त्याग , बलिदान का कद्र करता हूँ , उसका कोई सानी नहीं , इसके वाबजूद भी हम उनके राजनैतिक विचारों से संतुष्ट नहीं हूँ, भारत सरकार और राजनीति के महारथियो से जानना चाहता हूँ मुसलमान अल्पसंख्यक कैसे === सिख, जैन , बौद्ध ईसाई आदि की जनसंख्या मुसलमानों के हिसाब कम ही है , आज हिन्दुस्तान मे हिन्दुओं की हालत दयनीय है , मुसलमान बहुल एरिये मे हिन्दू हिन्दू जैसी जिंदगी नहीं जी रहें है , जम्मू काश्मीर मे कश्मीरी ब्राह्मणों पर होने वाली ज्यादती जग विदित है , बिहार ,बंगाल , और असम बांगलादेशियों का गढ बन चुका है , मुजफ्फ़रनगर की हिन्दू बेदना उत्तरप्रदेश सरकार की नाकामी मुस्लिम वोट तुस्टीकरण का नतीजा है, ओवैसी और जैसे नेता सरेआम नफरत का बीज बोते हैं गूंगी बाहरी सरकारें सहन करती हैं , जामा मस्जिद का इमाम दिल्ली मे बैठकर वोट बांटता है ,जामा मस्जिद शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी कांग्रेस को समर्थन सम्प्रदायिक ताकत रोकने के लिये दे रहें हैं , बंगाल मे तृणमूल कांग्रेस , बिहार मे आर जे डी , को समर्थन देने की बात करते हैं , हमे विश्वास है अगर खुद चुनाव के मैदान मे आयें तो विजयश्री शायद स्वप्न मे भी नसीब ना हो , जैसा की पिछली बार सपा के टिकट पर खुद के रिश्तेदार को मुस्लिम बहुल एरिये से है , आज राजनीति के कुचक्र के चक्रव्यूह को अभिमन्यु अपनी माता के गर्भ सीख ले रहें हैं ,, अवसरवादिता की राजनीति करते हुये हमारे राजनेता अपने जमीर को गिरवी रख दिये हैं
,[1],आज भारत मे मुस्लिम नीति विकाश की मांग क्यों की जा रही है ,,,
[2] क्या भारत मे एक ही धर्म के लोग है जिनका हित सर्वोपरि है और सब गौण ,,,
[3] हमारे देश की राजनैतिक मंशा देखकर ऐसा आभास होता है कहीं हिन्दुस्तान की अस्मिता खतरें मे नहीं
, [4] देश की आन-बान शान के लिये सब कुछ कुर्बान करने वाले आजादी के महा नायक भगतसिंह , चंद्रशेखर आज़ाद , नेता सुभाषचन्द्र बोस आदि की भावनाओं के साथ कैसा खिलवाड़ ,,,,,
[5]सीमा पर हमारे देश के नौजवान पाक और चीन के घुस पैठ को रोकने के अपने जान की बाजी लगा देतें हैं ,,भारत के बाजार मे चाईना के सामानों की भरमार है , स्वदेशी कराह रहा , चाईना का समान धड़ल्ले से बिक रहा है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
[6]देश मे किसान आत्महत्या कर रहे हैं , उन पर सरकार की विफलता और उनकी दुलमुल नीति की नाकामीं का कारण है ,,
[7] आतंकबाद , भ्रस्टाचार और बलात्कार [व्यभिचार ] की सुरसा के मुख के समान बढ़ती जा रहीं है,
[8] देश मे महंगाई और बेरोजगारी ती जा रही है ,,,
आज समय की नजाकत वक्त के बदलते हुये नजरिये पर गौर किया जाय तो हिन्दुओं की रक्षा और देश की आन-बान के लिये मोदी जरूरी जरूरत हैं ,विकाश और समृद्धि की गंगा बहाना है मोदी को लाना आवश्यक है , गुजरात की धरा पर उनकी विकाश कार्यशैली जग विदित है , खाद्य सुरक्षा , शिक्षानीति ,और मानवीय आवश्यकता को सुदृढ़ तभी बन सकती है जब मोदी सरकार हो ,,,,
हिन्दी , हिन्दू हिन्दुस्तान ,मोदी की आये सरकार ,जन -जन मे नवस्फूर्ति भरेगी , मोदी की आये सरकार ,,,
भारत जैसे लोकतंत्र मे बने मोदी वजीरे-ए- आजम / ,,,
कासिम, ग़ोरी ,गजनवी , तैमूरलंग सा आलम ,
पिसती जनता हिन्दू रोवेऐ कासिम लंग जमाना ,
व्यभिचारी मुस्काय के बोले , नीक मिला ई जमाना ,
फि द र त , करके कुर्सी बैठे,
जन-जन के सब नोट हैं अइठें ,
मंहगाई की मार मरे जन ,
स्विस पैसा सब भेजें दना दन ,
बहे जन -जन मे नव धारा,
मोदी जन जन को है प्यारा ,
राज कहें अब राजनीति, राज करेंगे मोदी ,
जयचंदों की छूट गयी है अब तो भाई धोती ,
भारत की इस राजनीति में मोदी दिव्य है ज्योती ,[प्रकाश]
पूरब पश्चिम ,उत्तर -दक्षिण शंखनाद है मोदी ,
राजकिशोर मिश्रा [राज] 06/04/2014
तिलक तराजू संग तलवार , मोदी के नाम पर हाहाकार ,
हर-हर महादेव जय बोल ,
राजनीति मे गोलम गोल ,
नमो-नमो का जय जयकार,
मोदी की सुनलो ललकार ,
कितना भी गठबंधन कर लो ,
पार नहीं पाओगे ,
भारत की अब राजनीति मे ,
कमल अब खिलने वाला है,,,
भाईचारे की राजनीति का परिपोषक आने वाला है ,
भारत की अपनी देवभूमि मे ,
भगवा लहराने वाला है ,
देश -विदेश विदूषक की , नीति बदलने वाली है ,
मोदी नाम की चर्चा मे , चमचा सब बदलने वाले है,
कितने तो बदल गये पहले , अब शेष बदलने वाले है,,
भारत की अर्थव्यवस्था का , अब चांद चमकने वाला है ,
भाजपा आने वाला है ,भाजपा आने वाला है ,
फिरगी सतरंगी सा नीति बदलने वाला है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
भाजपा आने वाला है ,भाजपा आने वाला है ,
कितनी भी दुस्तर व्यूह बनाएं अर्जुन सा भेदने वाला है ,,,
भारत की अब राजनीति मे कमल अब खिलने वाला है ,,
कृषक बेदना मुक्ति त्राण संजीवनी दिलाने वाला है ,
कीचड़ मे खिलता कमल फूल , अब जन -जन मे खिलने वाला है ,
भारत के अब नील गगन मे , भाजपा आने वाला है ,,,,
[2]
दामन पर दाग लगा जब हो ,
गठबंधन क्या निभ पायेगा , ,
स्वारथ की बलिबेदी पर ,
कुर्बान जहाँ को करते हो,
मानव की मानवता को खंडित नित करते रहते हो,
बात हुई जब कुर्सी की गिरगिट सा रंग बदलते हो ,
भारत माता का लाल है ,मोदी ,,
महिमा अपरम्पार है मोदी ,
तिलक, तराजू संग तलवार ,
मोदी के नाम पर हाहाकार ,
दल-दल मिलकर करें उपाय ,
मोदी से ना पावैं पार ,,
RAJKISHOR MISHRA [ RAJ ]
मंगलवार, 1 अप्रैल 2014
पञ्च गुणी
वायस गुण चाणक्य बखाना ,पञ्च गुणी गुणवंत बखाना ,
मैथुन गुप्त ,गुप्त निज चाला ,परम चतुर वायस मतवाला ,
संग्रह ,सावधान नित वायस , पर विश्वास करें नहि लायक ,
शुक्रवार, 21 मार्च 2014
होली की खुशियों की बधाई हो आपको ,
होली की खुशियों की बधाई हो आपको ,
प्रेम और नेह की सगाई दिखे आपको ,
खुशियों से भरी एक लुगाई मिले आपको ,
दिन मे सितारे नजर आयें सदा आपको ,
सूरज़ और चांद भी इंतजार करें आपका ,
खुशियाँ मे बेकरार रहें , नेह भरें आपसे ,
बुरा न मानो होली है =
बसन्ती बहार फागुए की खुमार
,सतरंगी रंगों की बहार ,
मस्तानी मद मस्त हवायें ,
नील गगन रंगीन आदाएं,
देवर -भाभी रंग मे झूमे ,
बुरा ना मानो होली है ,,
, पकवानों से सजी रसोई ,
रंगो की खुशबू है भीनी ,
लाल-गुलाल अबीर उड़े
,मन प्रेम का भंग सबहिं है नचायों ,
राज कहें अति राज की बात ,
भाभी देवर नेह रिझायों ,
प्रेम का भाव अजीब यहाँ ,
ममता अनुपम नव रूप दिखायो ,
देवर -भाभी का प्रेम परम् ,
चौदह भुवन बताय रह्यो
रविवार, 16 मार्च 2014
रंग में भंग चढ़ा रग में
इंद्रधनुष के सतरंगी रंगों को ,
नयी बहार मिले ,
झूम कर भीगे तन मन जन
, होली की खुशी अपार मिले ,,/
चाहत के फूल खिले दिल में ,
रंगों का नव उन्माद भरे ,
चाहत हो ऐसी अलबेली
पिचकारी से रंग की होली ,
मदन देख मन में मुस्काये ,
हम भी खेलेंगे होली ,
लाल गुलाल अबीर फुहारा
बृंदाबन जन -जन को न्यारा ,
लठ्ठ मार के होली न्यारी ,
मन में लाल गुलाल पिचकारी ,
मथुरा बृंदावन में खेलें ,
राधा -कृष्ण भी होली ,
रिद्धि -सिद्धि भी होली
खेलें ,
गणपति को रंग रंग में होली ,
आप भी मन से खेलो होली ,
भरें गणेश जी आपकी झोली ,
खुशी रंग रग रंग जाए
सावन सी हरियाली रहे ,
भादों सी बरसात ,
क्वार मास दशहरा रहे
सदा विजय प्रतीक ,
कार्तिक में धन झूम के बरषे ,
दीपावली माँ लक्ष्मी हरषे ,
अगहन पूस , माघ की ठंडी
फागुन खुशियों की बरसात ,
कृषक खुशी में
झूम उठे ,
खलियानों गूँज उठे ,
सदा ही आये फागुन मास , रंगों की
होये बरसात ,,,
[२]
रंग में भंग चढ़ा रग में ,
चहु ओर दिखे अंबर नीला ,
मन मयूर तरंग रंग ,
बिहंग कोकिल खरभरे ,
गजमुक्ता मदमस्त लगे गज ,
मानों भंग [भाँग ] तरंग उठायो ,
गर्जन करता सिंह कहे ,
हम भी खेलेंगे होली ,
फागुन का है माह ,
लगे सब झूम झुमैया
मीन और दादुर भी बोले
आ -रा रा ई या ,
हम भी बोले प्रेम से
भाईया होली हअईया
नयी बहार मिले ,
झूम कर भीगे तन मन जन
, होली की खुशी अपार मिले ,,/
चाहत के फूल खिले दिल में ,
रंगों का नव उन्माद भरे ,
चाहत हो ऐसी अलबेली
पिचकारी से रंग की होली ,
मदन देख मन में मुस्काये ,
हम भी खेलेंगे होली ,
लाल गुलाल अबीर फुहारा
बृंदाबन जन -जन को न्यारा ,
लठ्ठ मार के होली न्यारी ,
मन में लाल गुलाल पिचकारी ,
मथुरा बृंदावन में खेलें ,
राधा -कृष्ण भी होली ,
रिद्धि -सिद्धि भी होली
खेलें ,
गणपति को रंग रंग में होली ,
आप भी मन से खेलो होली ,
भरें गणेश जी आपकी झोली ,
खुशी रंग रग रंग जाए
सावन सी हरियाली रहे ,
भादों सी बरसात ,
क्वार मास दशहरा रहे
सदा विजय प्रतीक ,
कार्तिक में धन झूम के बरषे ,
दीपावली माँ लक्ष्मी हरषे ,
अगहन पूस , माघ की ठंडी
फागुन खुशियों की बरसात ,
कृषक खुशी में
झूम उठे ,
खलियानों गूँज उठे ,
सदा ही आये फागुन मास , रंगों की
होये बरसात ,,,
[२]
रंग में भंग चढ़ा रग में ,
चहु ओर दिखे अंबर नीला ,
मन मयूर तरंग रंग ,
बिहंग कोकिल खरभरे ,
गजमुक्ता मदमस्त लगे गज ,
मानों भंग [भाँग ] तरंग उठायो ,
गर्जन करता सिंह कहे ,
हम भी खेलेंगे होली ,
फागुन का है माह ,
लगे सब झूम झुमैया
मीन और दादुर भी बोले
आ -रा रा ई या ,
हम भी बोले प्रेम से
भाईया होली हअईया
राजनीति में चोखा माल
राजनीति नवनीति सुहावन, दल-दल सब अब लगे डरावण,
वोट नोट करते परिहास, अब नहि उनसे करिये आस,
कहे तुलसी नित शब्द सुहावन, ए लागिहें सब को मनभावन ,
कलियुग मे मसखरी जो जाना, सो नर को गुणवंत बखाना ,
नाचे -गावै छेड़े तान , जनता उनसे नित परेशान,,
रोज नवा कबोधन करते , जनता को नित -नित ही डसते ,,
माया का है जाल अनोखा , खाते नित सब चोखा -चोखा ,,
राजनीति मे भरे दलाल जनता को करते हैं हलाल ,
जनता बेबस फाँस फॅसी है , जैसे मछली जाल फंसी है ,,,,
राजनीति की ऐसी मार , बकरी शेर चले एक साथ,,
बकरी ,शेर चले एक साथ,फिर कैसे होता है राज ,
हर दल मे जब धड -धड होते , तभी तो सारे हलचल होते ,
राज कहें एक बात राज की , राजनीति परिहास आस की ,
सीट और कुर्सी के भूखे , नहीं वसूल -रसूल सरीखे ,,,,
मिली नहीं जब सीट भये , नेता जी दुखारी ,
क्रोध मे आकर नेता बोले , धीरे -धीरे पोपट खोले ,
इस दल मे सब भये दलाल , तभी तो हमरी ऐसी हाल,,
तीस साल सब भूल गयें है , पांच साल अब हाबी ,
देख रहे हो मिश्रा जी , आखिर कैसे बनाये लाबी ,,,
बड़े -बड़े सब ताकत रहिगे , बाजी मारें तिवारी ,
भन्नाएं सब नेता बोले ,क्या चाल चलें है तिवारी
RAJKISHOR MISHRA [RAJ] 16/3/2014
वोट नोट करते परिहास, अब नहि उनसे करिये आस,
कहे तुलसी नित शब्द सुहावन, ए लागिहें सब को मनभावन ,
कलियुग मे मसखरी जो जाना, सो नर को गुणवंत बखाना ,
नाचे -गावै छेड़े तान , जनता उनसे नित परेशान,,
रोज नवा कबोधन करते , जनता को नित -नित ही डसते ,,
माया का है जाल अनोखा , खाते नित सब चोखा -चोखा ,,
राजनीति मे भरे दलाल जनता को करते हैं हलाल ,
जनता बेबस फाँस फॅसी है , जैसे मछली जाल फंसी है ,,,,
राजनीति की ऐसी मार , बकरी शेर चले एक साथ,,
बकरी ,शेर चले एक साथ,फिर कैसे होता है राज ,
हर दल मे जब धड -धड होते , तभी तो सारे हलचल होते ,
राज कहें एक बात राज की , राजनीति परिहास आस की ,
सीट और कुर्सी के भूखे , नहीं वसूल -रसूल सरीखे ,,,,
मिली नहीं जब सीट भये , नेता जी दुखारी ,
क्रोध मे आकर नेता बोले , धीरे -धीरे पोपट खोले ,
इस दल मे सब भये दलाल , तभी तो हमरी ऐसी हाल,,
तीस साल सब भूल गयें है , पांच साल अब हाबी ,
देख रहे हो मिश्रा जी , आखिर कैसे बनाये लाबी ,,,
बड़े -बड़े सब ताकत रहिगे , बाजी मारें तिवारी ,
भन्नाएं सब नेता बोले ,क्या चाल चलें है तिवारी
RAJKISHOR MISHRA [RAJ] 16/3/2014
मयख़ाना
एक सिरफिरे ने आकर पूंछ लिया मुझसे ,
आखिर लोग मय खाने मे क्यों जाते हैं,
कुछ सोचकर मैने बोल दिया =
बदलते हुये जमाने की रंगशाला है मयख़ाना ,
दुनियाँ दारी की बीमारी का निजात मयख़ाना ,
धनुर्विद्या सीखने की कला है मयख़ाना ,
भूल जाते हैं लोग अपने अतीत को ,
कुछ खुशियाँ और गम के पुष्प जो खिले ,
लुटा देतें हैं पुष्प सारे , उस नील गगन मे ,
बजती रही शहनाईं उस नील गगन मे ,
तभी लगी रहती है भीड़ मैने आज जाना ,
तपाक से वह बोला ,,, क्या चीज़ है मयख़ाना ,
मैने सोच कर कुछ और बताता,
=काश गुनगुनाते हुये न आता ,,,
मयख़ाना बताया आपने मेरी दुनिया बदल गयी ,
गली -गली मे शबनम सी दिखती है यह दुनिया ,
मयख़ाना के प्यार से झूठी है यह दुनियाँ,
तारे भी तार से संगीत गुनगुनाते ,,,
धीरे -धीरे दुनियाँ मे चांद नजर आते ,
अनोखा अनुभव बताया मयखाने का ,
भूल से हमने बताया रास्ता मयखाने का...
आखिर लोग मय खाने मे क्यों जाते हैं,
कुछ सोचकर मैने बोल दिया =
बदलते हुये जमाने की रंगशाला है मयख़ाना ,
दुनियाँ दारी की बीमारी का निजात मयख़ाना ,
धनुर्विद्या सीखने की कला है मयख़ाना ,
भूल जाते हैं लोग अपने अतीत को ,
कुछ खुशियाँ और गम के पुष्प जो खिले ,
लुटा देतें हैं पुष्प सारे , उस नील गगन मे ,
बजती रही शहनाईं उस नील गगन मे ,
तभी लगी रहती है भीड़ मैने आज जाना ,
तपाक से वह बोला ,,, क्या चीज़ है मयख़ाना ,
मैने सोच कर कुछ और बताता,
=काश गुनगुनाते हुये न आता ,,,
मयख़ाना बताया आपने मेरी दुनिया बदल गयी ,
गली -गली मे शबनम सी दिखती है यह दुनिया ,
मयख़ाना के प्यार से झूठी है यह दुनियाँ,
तारे भी तार से संगीत गुनगुनाते ,,,
धीरे -धीरे दुनियाँ मे चांद नजर आते ,
अनोखा अनुभव बताया मयखाने का ,
भूल से हमने बताया रास्ता मयखाने का...
RAJKISHOR MISHRA [RAJ]
हिन्दी हिन्दुस्तान की शान हैं: मोदी
हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान की अस्मिता आज खतरे मे दिखाई दे रही है , हिन्दुस्तान मे अब हिन्दू भी सुरक्षित नहीं , चाहे वह मुज़फ़्फरनगर हो कश्मीर , राजनीति की बलि बेदी पर कुर्बान हो रहा है , आज राजनीति और राजनेताओं का कोई वसूल नहीं है , एक कहावत है वर मरे या कन्या पण्डित को दक्षिणा से काम ,,, आज हमारे राजनेता उसी नक्शे कदम पर चल रहे हैं ,,,, उन्हे समाज से ज्यादा अपने भविष्य को लेकर चिंता की लकीरें दिखाई देती है ,एक लोकोक्ति को सार्थक करने के लिये तत्पर रहते हैं , भा भिनसार बड़ी बिल खोदब,,,,,, न्यूज चैनल , न्यूज पेपर की खबरों पर दूरदृष्टि जमाये रहते है , कभी -कभी ऐसे कामेंट कर देतें है जिनका धरातलीय दुनिया से कोई सरोकार नहीं होता ,वोट और नोट की राजनीति मे अपने जमीर को भी गिरवी रख दिये हैं , उनकी अंतरात्मा उन्हे धिक्कारती है , यह क्या कर रहा हूँ, फिर भी धृतराष्ट्र बनने का ढोंग करते हैं ,,, राजनीति भी नुक्कत का खेल है ,शकुनि के पाशे अपने करतब दिखाने के लिये आतुर रहते हैं ,,,राजनीति राज्य और सरकार के अंतर्संबंधों का अध्ययन करती है , अब राजनीति राजनेता और वोटर विशेष निहित है प्रयोजनवाद सभी के सर पर चढ कर बोलता है , आज राजनीति मे गुंडेगर्दी और नोट का बोल बाला है ,, निर्वाचन आयोग कितना भी सक्त कानून बना दे , नेता जी उससे भी आंख मिचोली करने मे नहीं कतराते ,,हिन्दुत्व की रक्षा के लिये देश की आन -बान और शान हैं मोदी ,,,,,, सत्य और न्याय का प्रतीक हैं मोदी==
मोदी की बढ़ती हुई लोकप्रियता से त्रस्त सभी दलों को सिर्फ एक ही लक्ष्य दिखता है मोदी ,,,,मोदी विकाश पुरुष हैं , आज राजनीति के महारथी नित चक्रव्यूह बनाते है खुद के चक्रव्यूह मे स्वयंम् फंस कर हताश खिलाड़ी की तरह वार -पर वार किये जा रहें हैं,,,,,
मोदी प्रेम जगत सरनामा ,
कलुषित मन नाहिं राम का नामा ,,
कुटिल नीति खल रहे दुखारी ,
मन मे कबहुं कहाँ त्रिपुरारी ,
करहिं प्रेम सब ढोंग सयानी ,
नीति विरुद्ध नीति सम जानी ,
माया विवश ज्ञान नहि होई ,
ज्यों कामी विराग गति सोई /
वैसे जाल बुने दल-दल मे ,
कछुक ग्यान उभरे नहि मन मे ,
काशी महिमा अमित अपार ,
शारद शेष न पावहिं पार ,,,/
तीन लोक से बिलग है काशी ,
भोले , शिव बसते अबिनाशी ,,
तेहि नगरी मोदी चले हर्षित जन उल्लास ,
विजय गूँज जन -जन हिये
,मा भारती के लाल ,
गोपाल कवि ने काशी का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया है =
मंत्र महामणि विषय ब्याल के ,
मेटत कठिन कुअंक भाल के,
रामायण जब कही गोसाई ,
प्रगटन हित काशी फिर आई ,,,,
RAJKISHOR MISHRA [RAJ] 16/03/2014
शनिवार, 15 फ़रवरी 2014
नेतागीरी की दुकान
दुनिया मे बी बी सी न्यूज का धमाल देखो
हमरे भारत देशवा मे नेता कमाल देखो
दुनिया मे बी बी सी का धमाल देखो
हमारे देशवा मे नेता का मिशाल देखो ================================================ ,,,,,,
नेता सा बिजनेस नही ,
नहीं मान सम्मान ,
कभी न शेयर इनका गिरे ,
सदा रहें तैयार ,
सदा रहें तैयार करें ,
करें नित -नित ए गर्जन ,
सदा रहे खुशहाल ,
हमारे नेता नंदन सदा रहे खुशहाल,
हमारे नेता नंदन बदले नित -नित धाम हमारे नेता नंदन
आज प्रयोजनवादी युग मे हर व्यक्ति धनार्जन के लिये नित नये फार्मूले अपना रहें हैं ,,, पहले लोग डाक्टर ,इंजीनियर ,प्रशासक, न्यायमूर्ति , बनाना पसंद करते थे ,,,, आज वक्त के साथ लोगों के सोचने का नजरिया बदल रहा है , आज नेतागीरी जैसे कोई दुकान नहीं ,,, एक नेता हजारों उसके सिपहसालार छाछ नहीं रस मलाई ,,,,,, उसी मे दिखता है इन सिपाह सालारों की भलाई ,,,,,, आखिर गौर कीजिये नेता जी के साथ चलने वाले लाव -लश्कर क्या पानी से चलते हैं , अगर पानी से नहीं चलता फिर वह खर्च कहाँ से आता है ,,, विशाल रैली का आयोजन करना ,,, नेताजी को दिखाने लिये आदमी इकठ्ठा करना ,,,,,, यह सब क्या है ,,,,,, प्रशानिक प द छोड़ कर नेता बनाना ,,, आखिर क्या संदेश देना चाहते हैं,,,
भारतीय संस्कृति और होली
माघ मास की शुक्लपक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी कहते है ,,इसी दिन से ऋतुराज बसंत का शुभागमन जन -जन को रोमांचित कर देता है ,, अमराई मे कोयल कूंक पुष्पों से निकलने वाली भीनी -भीनी खुशबू जन-जन मे नवीन उत्साह का संचार कर देती है / इसी दिन वीणावादिनी का जन्मोत्सव होता है,, बसंत का संचार और माँ सरस्वती के वीणा की झंकार जन -जन को आह्लादित करदेती है ////बसंत के दिन से होली की शुरुवात हो जाती है ,,, होली बसंत ऋतु मे मनाया जानेवाला भारतीयों का महत्वपूर्ण त्योहार है ,बसंत के दिन भक्तगण ब्रज मे बांकेबिहारी के मंदिर मे गुलाल डाल कर होली का श्री गणेश करते हैं ,,,, हिन्दू वर्णव्यवस्थानुसार 4 वर्ण मे ब्राह्मण,क्षत्रिय ,वैश्य , और शूद्र ,मे विभाजित किया गया है ठीक उसी प्रकार क्रमश् चर प्रमुख त्योहार हैं ,,,,श्रावणी , दशहरा , दीपावली और होली ,,,,, होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता हैहोली मनाये जाने के तीन प्रमुख कारण हैं === [1] हिमाचल पुत्री पार्वती भगवान अनादि अनंन्त अविनाशी शिव से विवाह करने के लिये हिमाचल नंदनी अपर्णा [ पार्वती ]अमोघ तप कर रही थी देवताओं के आग्रह पर कामदेव शिव समाधि को भंग करने के लिये उस परम् स्थान पर गये जहाँ महादेव शिव तपस्या मे लीन थे ,,, हर तरह् के प्रयास से थकित होकर मदन [कामदेव ] बसंत का आवाहन करता है ,,,, छाड़े बिषम बिसिख उर लागे,, छूटि समाधि संभु जब जागे ,,,, भयउ ईस मन छो भु बिसेखी ,, नयन उघारि सकल दिसि देखी,/ सौरभ पल्लव मदनु बिलोका,,, भयहु कोप काँपे उ त्रैलोका ,,,,तब शिव तीसर नयन उघारा ,, चितवत काम भयहु ज रि छारा,,,,रामचरितमानस [बालकाण्ड]से
कामदेव के भस्म होने पर कामी[भोगी] मायूस और साधक निर्विघ्न हो जाते हैं ,,,, वासना पर विजय और प्रेम के प्रतीक के रूप मे मनाया जाता है ,,,, शिवगण शिव विवाह की खुशी मे होली मनाये ,,,, [2] हिरण्यकश्यपअपने बड़े भाई हिरणाक्ष की विष्णु भगवान द्वरा वध करने के कारण विष्णु विरोधी होकर स्वयं को विष्णु भक्ति विरोधी हो चुका था ,,,, उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु का अनन्य भक्त था ,,,, उसे मारने के अपनी बहन होलिका को अग्नि की चिता मे प्रवेश कर गयी , होलिका को वरदान था उसे अग्नि जला नहीं सकती ,,, विष्णुभक्त प्रह्लाद अग्नि से सकुशल बच गया , होलिका जल गयी ,, वरदान मर्यादित होते हैं ,,,, असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक के रूप मे मनाते हैं ,,, बुरा व्यक्ति कितना भी बलशाली क्यों ना हो आज नहीं तो कल उसकी पराजय अटल सत्य है ,,,
[3]द्वापर मे भगवान कृष्ण को मारने के लिये कंस ने पूतना को भेजा , वह सुन्दर स्त्री का रूपका रूप धारण करके कृष्ण को दूध रूपी विष देना चाहती थी , कृष्ण स्तनपान मे उसके प्राण हर लिये ,,, उसको जला कर ग्वालवालों ने होली के रूप मनाया ,,,,,
चैतशुदी प्रतिपदा से नववर्ष की शुरुवात होती है , नव संवत बसंत आगमन का प्रतीक है चैतशुदी प्रतिपदा के दिन मनु का जन्म हुआ था ,,बसंतपंचमी के दिन रेण की टहनी गाड़ कर होली लगाने की शुरुवात की जाती है ,,,, नारद पुराण , और भविष्यपुराण मे होली का वर्णन् मिलता है ,,,,,, होली मे गेहूँ , चना , जौ , की बालियों को भून कर चंद्र देव की पूजा की जाती है ,,,, होलिका दहनोपरांत अगले दिन सुबह रंग बिरंगी पिचकारी की धूम मे रंगों का सरोबार होजाता है ,,,, रंग बिरंगे रंगो की चमक , अबीर -गुलाल की बौछार मे सारा जहाँ रम जाता है ,,,, होली का उत्साह नये वर्ष की शुरुवात अपनेपन का एहसास मन को रोमांचित कर देता , मन मयूर बाग़-बाग़ हो जाता है ,,,/
आर्यावत [भारत] मे होली का पर्व आर्यों के समय से मनाये जाने का प्रचलन था ,,,,,, मुस्लिम कवियों ने अपनी रचनाओं मे इस बात का उल्लेख किया है , होली को हिन्दू ही नहीं मुसलमान भी बखूबी मानते थे ,,,, मुग़लकाल मे होली अपने चरमोत्कर्ष पर था ,,, अकबर , जोधाबाई ,,, जहाँगीर , नूरजहाँ आदि बड़े धूम धाम से मनाते हैं ,,,, आज भी बहुत से मुसलमान भाई धूम-धाम से माना रहें है ,,, होली के दिन सारे गीले शिकवे भूलकर दुश्मन भी गले लग जाते हैं ,,,,, होली भाईचारे और भातृत्व भाव का परिपोषक है ,,,,, रंग बिरंगे रंगों की चमक मे अबीर -गुलाल की बौछार फगुआ गीतों की मदमस्त आदाओं मे भांग की ठंडाई गोझिये की मिठास बसन्त ऋतु की आदाये मन मे नवीन उत्साह से भाव-बिभोर कर देतीं हैं ,,,,,,,
आज समयानुसार सभी त्योहार अपनी मौलिकता को खोते जा रहे हैं ,, होली स्नेह प्रेम की डोर की प्रतीक होती थी , लेकिन आज यही रंग अबीर गुलाल रसायनिक मिलावट की बलिबेदी कुर्बान होता जा रहा है ,, अब प्रेम एक दिखवा बनता जा रहा है ,,,, रंग के साथ-साथ लोग द्वेषवश पेन्ट का भी उपयोग करने लगे हैं ,,, जो नेह को तार -तार कर देता है ,,,
,होली सद्भाव भाईचारा , प्रेम , और रंगों का बसंत ऋतु का बसंती त्योहार है , बसंत कामदेव का अमोघ सहचर है ,, बसंत के आनेपर वृक्षों मे नवपुष्प और नव किसलय का संचार हो जाता है , जिसके आगमन मात्र से बाग़ ,तालाब , नदियाँ , समुद्र , पहाड़ , और दशों दिशाएं मे प्रेम का सरोबार होजाता ,,,,,मलयागिरि से शीतल, मंद सुगंध वायु बहाने लगती है , बागों मे कोयलियाँ ,भ्रमर मधुर गुञ्जार, हंस और तोते के मधुर शब्द दिल मे नया उन्माद भर देतें है /,,,,,मनुष्य को प्रकृति का अनुकरण करना चाहिये ,,,, उसी मे समाज का हित निहित है ,,,,,
, खुशियाँ बिखेरे होली, दिल खोल -खोल कर,,,,
ले लो जितना चाहे ,मन तोल -तोल कर ,,,,
पाँच दुर्गुणों की होली जलाकर देखो,
खुशियाँ बहार लाएंगी ,उसको लुटा कर देखो,
काम ,क्रोध ,लोभ, से भला कहाँ हुआ है ,
मोह ,अहांकार से दुनियाँ ही नित जला है,,
खुशियाँ बिखेरे होली, दिल खोल -खोल कर,,,,
ले लो जितना चाहे ,मन तोल -तोल कर ,,,,
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