गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

मोदी से दिल्ली दूर नहीं

तेजी से बदल रहे भारतीय राजनैतिक परिदृश्य पर गौर किया जाय तब मोदी दिल्ली के लिये अपरिहार्य हैं , जन -जन का है एक ही नारा , मोदी भारत को है प्यारा ,,,,, आज मीडिया से लेकर जन -जन मे मोदी का बोलबाला है उत्तर भारत मे मोदी लहर अन्य विरोधी राजनैतिक पार्टी के लिये कहर सी बन गयी है , राजनैतिक घटक गठबंधन की रस्साकसी मे लगे है ,,,,,बढ़ती हुई मंहगाई ,बेरोजगारी ,कृषकों की आत्महत्या , शिक्षा का गिरता हुआ स्तर , भ्रष्टाचार और व्यभिचार ,,जवानों के साथ न इंसाफी ,,, लालबहादुर शास्त्री का नारा था , जय जवान जय किसान , , आज उसी कांग्रेस के राज्य मे किसान आत्महत्या कर रहे हैं ,,,,,,,भ्रष्टाचार का बोलबाला है , विदेश मे जमा काला धन की वापसी राजनैतिक विफलता का कारक बन चुका है , मेरा भारत देश , न जाने कितने बे ईमान ,,,,, फिर भी मेरा देश महान ,,,,,    आज की राजनीति का स्वरूप बदल चुका है जिसका वास्तविकता से परे है , जन -जन को दिकभ्रमित कर रहा है ठीक उसी प्रकार से जैसे ====कागज के घोड़े सवार की मंजिल तय नहीं का सकते , कागज के फूल खुशबू नहीं दे सकते ,राजनीति एक ऐसाआखाड़ा है जहाँ वोट और नोट की प्रतिस्पर्धा उनके मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है, उससे कोई भी दल नहीं बच सकता , आज राजनीति मे स्वार्थ का बोलबाला है , टिकट ना मिलना , या सही जगह [मांगे गये ] से टिकट न मिलना राजनैतिक प्रतिस्पर्धा सबसे बड़ी बाधा है , ज्यादातर सीनीयर [वरिष्ठ] कार्यकर्ता टिकट और स्थान अपने मान का पर्याय समझ लेते हैं दल [ पार्टी ] की अपेक्षा अपने हित को सर्वोपरि मान बैठते हैं ,,,, राजनीति प्रतिद्वंदिता का वह मैदान है जहां स्वहिताय का बोलबाला रहता है , कभी -कभी प्रमुख नेता भी पार्टी के हाशिये पर आ जाते हैं , राजनैतिक युद्धय मे सब जायज होता है , मनुस्मृति मे कहा गया है - मत्स्य शासन प्रणाली मे बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है ,, वक्त का हर शय ग़ुलाम ,,,, समय की नजाकत और भाग्य की दशा को कोई नहीं बदल सकता , ग्रह की दशाएं और मनुष्य का भाग्य कोई नहीं जान सकता ,,,, आज मोदी चाय , नमो-नमो , हर-हर मोदी का शंखनाद जन -जन मे गूँज रहा है ,,,

हिन्दी ,हिन्दू , हिन्दूस्तान की अस्मिता खतरें मे ,,,,

हम गाँधी परिवार के त्याग , बलिदान का कद्र करता हूँ , उसका कोई सानी नहीं , इसके वाबजूद भी हम उनके राजनैतिक विचारों से संतुष्ट नहीं हूँ, भारत सरकार और राजनीति के महारथियो से जानना चाहता हूँ मुसलमान अल्पसंख्यक कैसे === सिख, जैन , बौद्ध ईसाई आदि की जनसंख्या मुसलमानों के हिसाब कम ही है , आज हिन्दुस्तान मे हिन्दुओं की हालत दयनीय है , मुसलमान बहुल एरिये मे हिन्दू हिन्दू जैसी जिंदगी नहीं जी रहें है , जम्मू काश्मीर मे कश्मीरी ब्राह्मणों पर होने वाली ज्यादती जग विदित है , बिहार ,बंगाल , और असम बांगलादेशियों का गढ बन चुका है , मुजफ्फ़रनगर की हिन्दू बेदना उत्तरप्रदेश सरकार की नाकामी मुस्लिम वोट तुस्टीकरण का नतीजा है, ओवैसी और जैसे नेता सरेआम नफरत का बीज बोते हैं गूंगी बाहरी सरकारें सहन करती हैं , जामा मस्जिद का इमाम दिल्ली मे बैठकर वोट बांटता है ,जामा मस्जिद शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी कांग्रेस को समर्थन सम्प्रदायिक ताकत रोकने के लिये दे रहें हैं , बंगाल  मे तृणमूल कांग्रेस , बिहार मे आर जे डी , को समर्थन देने की बात करते हैं , हमे विश्वास है अगर खुद चुनाव के मैदान मे आयें तो विजयश्री शायद स्वप्न मे भी नसीब ना हो , जैसा की पिछली बार सपा के टिकट पर खुद के रिश्तेदार को मुस्लिम बहुल एरिये से  है , आज राजनीति के कुचक्र के चक्रव्यूह को अभिमन्यु अपनी माता के गर्भ सीख ले रहें हैं ,, अवसरवादिता की राजनीति करते हुये हमारे राजनेता अपने जमीर को गिरवी रख दिये हैं

,[1],आज भारत मे मुस्लिम नीति विकाश की मांग क्यों की जा रही है ,,,

[2] क्या भारत मे एक ही धर्म के लोग है जिनका हित सर्वोपरि है और सब गौण ,,,

[3] हमारे देश की राजनैतिक मंशा देखकर ऐसा आभास होता है कहीं हिन्दुस्तान की अस्मिता खतरें मे नहीं

, [4] देश की आन-बान शान के लिये सब कुछ कुर्बान करने वाले आजादी के महा नायक भगतसिंह , चंद्रशेखर आज़ाद , नेता सुभाषचन्द्र बोस आदि की भावनाओं के साथ कैसा खिलवाड़ ,,,,,

[5]सीमा पर हमारे देश के नौजवान पाक और चीन के घुस पैठ को रोकने के अपने जान की बाजी लगा देतें हैं ,,भारत के बाजार मे चाईना के सामानों की भरमार है , स्वदेशी कराह रहा , चाईना का समान धड़ल्ले से बिक रहा है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

[6]देश मे किसान आत्महत्या कर रहे हैं , उन पर सरकार की विफलता और उनकी दुलमुल नीति की नाकामीं का कारण है ,,

[7] आतंकबाद , भ्रस्टाचार और बलात्कार [व्यभिचार ] की सुरसा के मुख के समान बढ़ती जा रहीं है,

[8] देश मे महंगाई और बेरोजगारी ती जा रही है ,,,

आज समय की नजाकत वक्त के बदलते हुये नजरिये पर गौर किया जाय तो हिन्दुओं की रक्षा और देश की आन-बान के लिये मोदी जरूरी जरूरत हैं ,विकाश और समृद्धि की गंगा बहाना है मोदी को लाना आवश्यक है , गुजरात की धरा पर उनकी विकाश कार्यशैली जग विदित है , खाद्य सुरक्षा , शिक्षानीति ,और मानवीय आवश्यकता को सुदृढ़ तभी बन सकती है जब मोदी सरकार हो ,,,,

हिन्दी , हिन्दू हिन्दुस्तान ,मोदी की आये सरकार ,जन -जन मे नवस्फूर्ति भरेगी , मोदी की आये सरकार ,,,

भारत जैसे लोकतंत्र मे बने मोदी वजीरे-ए- आजम / ,,,

कासिम, ग़ोरी ,गजनवी , तैमूरलंग सा आलम ,

पिसती जनता हिन्दू रोवेऐ कासिम लंग जमाना ,

व्यभिचारी मुस्काय के बोले , नीक मिला ई जमाना ,

फि द र त , करके कुर्सी बैठे,

 

जन-जन के सब नोट हैं अइठें ,

मंहगाई की  मार मरे जन ,

स्विस पैसा सब भेजें दना दन ,

बहे जन -जन मे नव धारा,

मोदी जन जन को है प्यारा ,

राज कहें अब राजनीति, राज करेंगे मोदी ,

जयचंदों की छूट गयी है अब तो भाई धोती ,

भारत की इस राजनीति  में मोदी दिव्य है ज्योती ,[प्रकाश]

पूरब पश्चिम ,उत्तर -दक्षिण शंखनाद है मोदी ,

राजकिशोर मिश्रा [राज] 06/04/2014

तिलक तराजू संग तलवार , मोदी के नाम पर हाहाकार ,

हर-हर महादेव जय बोल ,
राजनीति मे गोलम गोल ,
नमो-नमो का जय जयकार,
मोदी की सुनलो ललकार ,
कितना भी गठबंधन कर लो ,
पार नहीं पाओगे ,
भारत की अब राजनीति मे ,
कमल अब खिलने वाला है,,,
भाईचारे की राजनीति का परिपोषक आने वाला है ,
भारत की अपनी देवभूमि मे ,
भगवा लहराने वाला है ,
देश -विदेश विदूषक की , नीति बदलने वाली है ,
मोदी नाम की चर्चा मे , चमचा सब बदलने वाले है,
कितने तो बदल गये पहले , अब शेष बदलने वाले है,,
भारत की अर्थव्यवस्था का , अब चांद चमकने वाला है ,
भाजपा आने वाला है ,भाजपा आने वाला है ,
फिरगी सतरंगी सा नीति बदलने वाला है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
भाजपा आने वाला है ,भाजपा आने वाला है ,
कितनी भी दुस्तर व्यूह बनाएं अर्जुन सा भेदने वाला है ,,,
भारत की अब राजनीति मे कमल अब खिलने वाला है ,,

कृषक बेदना मुक्ति त्राण संजीवनी दिलाने वाला है ,
कीचड़ मे खिलता कमल फूल , अब जन -जन मे खिलने वाला है ,
भारत के अब नील गगन मे , भाजपा आने वाला है ,,,,
 [2]
दामन पर दाग लगा जब हो  ,
गठबंधन क्या निभ पायेगा , ,
स्वारथ की बलिबेदी पर ,
कुर्बान जहाँ को करते हो,
मानव की मानवता को खंडित नित करते रहते हो,
बात हुई जब कुर्सी की गिरगिट सा रंग बदलते हो ,
भारत  माता का लाल है ,मोदी ,,
  महिमा अपरम्पार है मोदी , 
 तिलक, तराजू  संग तलवार ,
मोदी के नाम पर हाहाकार ,
दल-दल मिलकर करें उपाय ,
मोदी से ना पावैं पार ,,
RAJKISHOR   MISHRA  [  RAJ ]

मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

पञ्च गुणी





वायस   गुण   चाणक्य    बखाना ,पञ्च    गुणी    गुणवंत    बखाना ,
मैथुन  गुप्त ,गुप्त  निज    चाला ,परम    चतुर   वायस   मतवाला ,
संग्रह ,सावधान   नित   वायस ,    पर    विश्वास    करें   नहि  लायक ,

शुक्रवार, 21 मार्च 2014

होली की खुशियों की बधाई हो आपको ,

होली की खुशियों की बधाई हो आपको ,
प्रेम और नेह की सगाई दिखे आपको ,
खुशियों से भरी एक लुगाई मिले आपको ,
दिन मे सितारे नजर आयें सदा आपको ,
सूरज़ और चांद भी इंतजार करें आपका ,
खुशियाँ मे बेकरार रहें , नेह भरें आपसे ,

बुरा न मानो होली है =

बसन्ती बहार फागुए की खुमार
,सतरंगी रंगों की बहार ,
मस्तानी मद मस्त हवायें ,
नील गगन रंगीन आदाएं,
देवर -भाभी रंग मे झूमे ,
बुरा ना मानो होली है ,,
, पकवानों से सजी रसोई ,
रंगो की खुशबू है भीनी ,
लाल-गुलाल अबीर उड़े
,मन प्रेम का भंग सबहिं है नचायों ,
राज कहें अति राज की बात ,
भाभी देवर नेह रिझायों ,
प्रेम का भाव अजीब यहाँ ,
ममता अनुपम नव रूप दिखायो ,
देवर -भाभी का प्रेम परम् ,
चौदह भुवन बताय रह्यो 

रविवार, 16 मार्च 2014

रंग में भंग चढ़ा रग में

इंद्रधनुष के   सतरंगी   रंगों    को  ,
नयी    बहार   मिले ,
झूम  कर  भीगे   तन   मन  जन
, होली   की    खुशी अपार   मिले ,,/
चाहत   के   फूल   खिले   दिल    में ,
रंगों    का  नव   उन्माद    भरे ,
चाहत   हो  ऐसी   अलबेली
पिचकारी   से    रंग   की    होली ,
मदन   देख    मन   में    मुस्काये ,
हम   भी    खेलेंगे    होली ,
लाल गुलाल   अबीर   फुहारा
बृंदाबन   जन -जन   को  न्यारा ,
लठ्ठ  मार    के   होली  न्यारी ,
मन   में    लाल    गुलाल    पिचकारी ,
मथुरा बृंदावन   में   खेलें ,
राधा -कृष्ण   भी   होली ,
रिद्धि -सिद्धि   भी    होली  
खेलें ,
गणपति  को   रंग   रंग   में  होली ,
आप   भी   मन   से  खेलो    होली ,
भरें   गणेश    जी  आपकी   झोली ,
खुशी   रंग   रग   रंग   जाए
सावन   सी   हरियाली    रहे ,
भादों   सी   बरसात ,
क्वार  मास दशहरा    रहे
सदा   विजय   प्रतीक ,
कार्तिक   में   धन   झूम   के   बरषे ,
दीपावली  माँ   लक्ष्मी    हरषे  ,
अगहन  पूस , माघ की   ठंडी
फागुन   खुशियों  की   बरसात ,
कृषक   खुशी  में
 झूम   उठे ,
खलियानों  गूँज   उठे ,
सदा   ही   आये   फागुन   मास ,  रंगों  की
होये   बरसात ,,,
[२]
रंग   में  भंग   चढ़ा   रग   में ,
चहु   ओर दिखे    अंबर   नीला ,
मन  मयूर तरंग   रंग ,
बिहंग   कोकिल खरभरे ,
गजमुक्ता  मदमस्त   लगे   गज ,
मानों   भंग [भाँग ]   तरंग   उठायो ,
गर्जन   करता   सिंह   कहे ,
हम  भी   खेलेंगे    होली ,
फागुन   का   है   माह ,
लगे  सब   झूम    झुमैया
मीन  और   दादुर   भी   बोले
आ -रा   रा  ई   या ,
हम  भी   बोले   प्रेम   से
भाईया    होली    हअईया