गुरुवार, 17 अक्टूबर 2013

बेटी हैंकुल सेतु

बेटी कुल सेतु हुआ करती,
दो कुल इससे तर जाते हैं,,,
प्रेम ,स्नेह ,सद्भाव की गुड़िया ,
ह्रदय कमल खिल जाते हैं,,
सेवा और समर्पण इतना ,
बरबस सब झुक जाते हैं,,
बेटी कुल सेतु हुआ करती,
दो कुल इससे तर जाते हैं,,,,
बेटी सोम सुधा रस जैसी,
,मम्मी ,पापा के नैनो पलकी,,
आँगन की मुस्कान है बेटी ,,,
,सारे जहां की शान है बेटी ,,
प्रेम की निर्मल गंगा बहती ,,
जन -जन को आनन्दित करती ,,
बेटी कुल सेतु हुआ करती ,,
दो कुल इससे तर जाते हैं।
पुत्री कूलसेतु हुआ करती ,
 जब पुत्री पुत्री सी रहती ,,,,
मायके ससुराल की रौनक है ,
,बाबुल के आँगन की बिटिया ,,
चाहत की प्रतिमूर्ति सी गुड़िया
, ग्यान और विग्यान की सूरति,,,
दो वंशों की कुल गौरव है ,,
 प्रेम ,स्नेह धर्म आकांक्षा मूरति
बेटी कुल सेतु हुआ करती,
दो कुल इससे तर जाते हैं,,,

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