पलाश के फूल
तुममे क्या नूर ,, ,
बसंतकाल भी कितना
रमणीक है
तेरे पुष्पों में
रक्त वर्ण की क्या तस्वीर है ,,
सुन्दर फूलों का प्रमुख वृक्ष ,,,
होली के रंगों का पलाश ,,,,
पृथ्वी के आँचल का गुलाब ,,,
पथिकों की चाहत लाजबाब
देख पुष्प मोहे मन राही ,,,,
हे पलाश क्या नूर है तुममे ,,,
ब्रह्मा ,विष्णु महेश ,,
विराजे ,,,,,
मदन देख उत्कंठा मोहे ,,
जन -जन का आकर्षण होवे ,,,,,
पल्लव धूसर रेशम रोयां ,,
त्रिपल पत्तिका जन -जन मोहे ,,,,
उत्तम कुल का पुष्प पलाश ,,
जीवन का सच्चा अनुराग ,,,,,
कवियों के दिल का है तू राज ,,,
राज भी कहता वाह पलाश ,,,,,,
तुममे क्या नूर ,, ,
बसंतकाल भी कितना
रमणीक है
तेरे पुष्पों में
रक्त वर्ण की क्या तस्वीर है ,,
सुन्दर फूलों का प्रमुख वृक्ष ,,,
होली के रंगों का पलाश ,,,,
पृथ्वी के आँचल का गुलाब ,,,
पथिकों की चाहत लाजबाब
देख पुष्प मोहे मन राही ,,,,
हे पलाश क्या नूर है तुममे ,,,
ब्रह्मा ,विष्णु महेश ,,
विराजे ,,,,,
मदन देख उत्कंठा मोहे ,,
जन -जन का आकर्षण होवे ,,,,,
पल्लव धूसर रेशम रोयां ,,
त्रिपल पत्तिका जन -जन मोहे ,,,,
उत्तम कुल का पुष्प पलाश ,,
जीवन का सच्चा अनुराग ,,,,,
कवियों के दिल का है तू राज ,,,
राज भी कहता वाह पलाश ,,,,,,
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