गुरुवार, 19 सितंबर 2013

व्यभिचारिन पड़ोसन धमाल कर गयी ,,,,



व्यभिचारिन पड़ोसन धमाल कर गयी ,,,,

राह चलते मुसाफिर को बीमार कर गयी ,,

सोच कर गर कदम ठहरी होती पड़ोसन ,,,

मुसाफिर भी मिलते, न इतने सितमगर

बेजानों से दिल की दुआ कर रही है ,,

व्यभिचारिन पड़ोसन शरम कर रही है

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बेजानों की दुनिया मुहब्बत की आशा ,

तोहमत भरी जिंदगी का निराशा ,,

चाहत पर ऐसा करम कर गई है ,,

मासूक जिंदगी  मे कहर ढा    गयी है ,,,,

व्यभिचारिन पड़ोसन शरम कर रही है,,

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सोच  कर  गर  सितम,

 आंसू  बहते हैं  उनके ,,,

ज़ख्मों के उनके दवा क्या करोगे  ?

बेजानों से दिल की दुआ कर रही है ,,

व्यभिचारिन पड़ोसन शरम कर रही है


 

 



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