गुरुवार, 12 सितंबर 2013

मजहब के नाम पर कितना वोट लोगे ,,

मजहब के नाम पर कितना वोट लोगे ,,
, अपने जमीर से पूछों खुद को कितना नोच लोगे ,,
, धर्म और जाति को बदनाम न करो
जिस माँ के गर्भ मे पले उसे तवाह न करो ,,,,
मजहब के नाम पर कितना वोट लोगे ,,,
जिस माँ के सिंदूरों की लाली ,,
मिट जाती तेरे वोटों से ,,
क्या जाकर दोगे तुम जबाब ,
 मिट  जाता  उनके ख्वाबों का आफताब ,,
ममता की आँचल का चिराग ,
मानवता करती नित विलाप ,
क्रन्दन करता है आफताब ,,,
बुझ जाता माँ के आंचल का चिराग ,,
 व़हाँ जाकर दोगे क्या जबाब ,,,,
कितना हलाहल भर दोगे,
अपने पराये आंचल मे ,,,
मानवता का त्राहि -त्राहि होता है तेरे आँगन मे ,,
कितनी विषधर है राजनीति ,, उससे विषधर है राजदंड,,
मजहब के नाम पर कितना वोट लोगे ,,,
फिरंगियों की तरह देश को बर्बाद ना करो ,,
मजहब के नाम पर कितना वार करोगे ,,
भाईचारे को कितना नीलाम करोगे ,,,,
मजहब के नाम पर कितना वोट लोगे ,,,,,,,,,,

अपनी माँ के आंचल कितना दाग भरोगे ,,,
मजहब के नाम पर कितना वोट लोगे ,,,,,,,,,,

अपनी माँ के आंचल में  कितना दाग भरोगे ,,,

ए राजनीति के मुसाफिर सोच लीजिये ,,

मजहब के नाम पर न धमाल कीजिये ,,,

खुद जीओ और दूसरे को जीने एहसान कीजिये

जो दे रहे हो दर्द उसका एहसास कीजिये ,,

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